नई दिल्ली में आदरणीय डॉ. चिन्मय पंड्या जी ने पूर्व मुख्य न्यायाधीश डी. वाय. चंद्रचूड़ जी से की शिष्टाचार भेंट
अखिल विश्व गायत्री परिवार के प्रतिनिधि आदरणीय डॉ. चिन्मय पंड्या जी ने अपने दो दिवसीय पटना एवं दिल्ली प्रवास के क्रम में नई दिल्ली में भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश डी. वाय. चंद्रचूड़ जी से आत्मीय भेंट की।
इस अवसर पर भारतीय संस्कृति, परम पूज्य गुरुदेव पं. श्रीराम शर्मा आचार्य जी के तपपूर्ण जीवन एवं उनके युगदृष्टा चिंतन पर विस्तृत चर्चा हुई। आदरणीय डॉ. चिन्मय पंड्या जी ने गुरुदेव द्वारा स्थापित युग निर्माण आंदोलन, वैज्ञानिक अध्यात्मवाद एवं मानवता केंद्रित जीवनदृष्टि के माध्यम से समाज में सकारात्मक परिवर्तन हेतु चलाए जा रहे विविध रचनात्मक अभियानों की जानकारी साझा की।
भेंट के दौरान देव संस्कृति विश्वविद्यालय में संचालित भारतीय संस्कृति, योग, अध्यात्म, नैतिक शिक्षा एवं समग्र व्यक्तित्व विकास आधारित पाठ्यक्रमों पर भी विशेष संवाद हुआ। उन्होंने देव संस्कृति विश्वविद्यालय द्वारा शिक्षा को संस्कार, साधना एवं जीवन मूल्यों से जोड़ने के प्रयासों की सराहना की गई।
इस अवसर पर आदरणीय डॉ. चिन्मय पंड्या जी ने देव संस्कृति विश्वविद्यालय में आयोजित होने वाले अंतरराष्ट्रीय ए. आई. कॉन्फ्रेंस हेतु एवं परम वंदनीया माता भगवती देवी शर्मा जी एवं अखंड दीपक शताब्दी समारोह में सहभागिता हेतु पूर्व मुख्य न्यायाधीश डी. वाय. चंद्रचूड़ जी को सादर आमंत्रण भी प्रदान किया।
यह आत्मीय मुलाकात भारतीय संस्कृति, मूल्यनिष्ठ शिक्षा एवं नवयुग निर्माण की साझा प्रतिबद्धता का प्रेरणास्पद प्रतीक रही।
Recent Post
अखिल विश्व गायत्री परिवार के आवाहन पर घर घर किया गया यज्ञ
घर घर में में हम यज्ञ रचाएं, आओ भारत सबल बनाएं इसी कामना से आज बुद्ध पूर्णिमा के पावन पर्व पर अखिल विश्व गायत्री परिवार, शांतिकुंज (हरिद्वार) के दिशा निर्देश पर जनपद बलरामपुर के पचपेड़वा, गैं...
अब दर्शन की बारी है, उसे कुछ करने दिया जाए
विज्ञान का तात्पर्य— “प्रकृति के कुछ रहस्यों का उद्घाटन अथवा कुछ उपकरणों का निर्माण कर लेना मात्र नहीं है, वरन् उसकी व्यापकता मानवी दृष्टिकोण को अधिक सुविस्तृत, तथ्यपूर्ण एवं सत्यनिष्ठ ...
धर्म और दर्शन की उत्क्रांति भी आवश्यक
भावी पीढ़ी को मानसिक दिग्भ्रांति से बचाने के लिए यह प्रश्न सुलझाना आवश्यक है। धर्म के गिरते हुए मूल्य को देखकर ऐसा लगता है कि कहीं आने वाली पीढ़ियाँ पूर्णतया पदार्थवादी होकर अपनी आध्यात्मिक शक्तिया...
धर्म और विज्ञान जुड़वाँ भाई
पिछले दिनों धर्म और विज्ञान को विरोधी माना जाता रहा है। दोनों के तर्क, प्रतिपादन और आधार एकदूसरे से भिन्न समझे जाते रहे हैं। एक को प्रत्यक्षवादी और दूसरे को परोक्षवादी कहकर उन्हें असंबद्ध कहा जाता ...
विज्ञान और धर्म में समन्वय अनिवार्य
पदार्थ के रूप में विज्ञान भी आंतरिक सत्ता का ही तो उद्घाटन करता है। धर्म के क्षेत्र में परमात्मा एक विश्वव्यापक शक्ति है और पदार्थ भी शक्ति के ही कण हैं। सच तो यह है कि शक्ति के अतिरिक्त संसार में ...
धर्म की उपेक्षा से पछतावा ही हाथ लगेगा
जीवन उतना जटिल नहीं है, जितना कि बन गया है या बना दिया गया है। हँसी-खुशी की संभावनाओं से वह भरा-पूरा है। शरीर और मन की संरचना इस प्रकार हुई है कि वह बाहर के तनिक से साधनों की सुविधा प्राप्त हो जाने...
धर्म और विज्ञान को मिलकर चलना होगा
धर्म को पूजा-प्रक्रिया तक और विज्ञान को शिल्प व्यवसाय तक सीमित रखा जाए, तो दोनों की गरिमा बढ़ेगी नहीं, गिरेगी ही। दोनों अपंग-अधूरे रह जाएँगे। इन दोनों का परस्पर पूरक होकर रहना उचित ही नहीं, आवश्यक ...
धर्म और विज्ञान के समन्वय में ही कल्याण है
नर और नारी का कार्यक्षेत्र भिन्न है। नारी गृह-व्यवस्था में संलग्न रहती है। गर्भधारण और शिशुपालन यह दोनों काम उसी को करने होते हैं। नर का कार्यक्षेत्र भिन्न है। वह खेत, दफ्तर, कारखाने आदि में ...
ज्ञान ही नहीं, मनुष्य को धर्म भी चाहिए
आत्मा है या नहीं? इसका उत्तर हाँ और ना में दोनों ही तरह दिया जा सकता है। हाँ, उनके लिए ठीक है, जो ज्ञान के आधार पर सूक्ष्म विषयों पर विचार कर सकने और निष्कर्ष निकाल सकने में समर्थ हैं। ना, उनके लिए...
बुद्धि पर धर्म का अंकुश रखा जाए
चेतना के क्षेत्र में मन और बुद्धि का एक क्षेत्र है और श्रद्धा एवं सुसंस्कारिता का दूसरा। मन भौतिक साधनों के सहारे इंद्रियतृप्ति तथा अहंता की पूर्ति चाहता है। अर्थसंचय तथा बड़प्पन प्रदर्शित करने वाल...

