राष्ट्र निर्माण एवं नेतृत्व विषयों पर नौसेना प्रमुख श्री दिनेश के. त्रिपाठी जी से विशेष संवाद
अखिल विश्व गायत्री परिवार के प्रतिनिधि आदरणीय डॉक्टर चिन्मय पंड्या जी ने दिल्ली प्रवास के दौरान भारतीय नौसेना प्रमुख माननीय श्री दिनेश के. त्रिपाठी जी से सौहार्दपूर्ण भेंट की।
इस अवसर पर राष्ट्र निर्माण, सशक्त नेतृत्व, राष्ट्रीय सुरक्षा चेतना एवं अनुशासित कार्यसंस्कृति जैसे विषयों पर सार्थक संवाद हुआ। परमपूज्य गुरुदेव पं. श्रीराम शर्मा आचार्य जी के युग निर्माण आंदोलन एवं राष्ट्रनिष्ठ व्यक्तित्व निर्माण की व्यापक दृष्टि पर भी चर्चा हुई। साथ ही युवा पीढ़ी में समर्पण, धैर्य एवं सामुहिकता जैसे जीवन मूल्यों के संवर्धन की आवश्यकता पर विशेष बल दिया।
आदरणीय डॉ. चिन्मय पंड्या जी ने अखिल विश्व गायत्री परिवार द्वारा समाज निर्माण हेतु किए जा रहे विभिन्न रचनात्मक कार्यों एवं देव संस्कृति विश्वविद्यालय द्वारा संस्कारनिष्ठ एवं उत्तरदायी युवा पीढ़ी के निर्माण हेतु संचालित प्रयासों की जानकारी साझा की और जन्मशताब्दी समारोह हेतु सादर आमंत्रण देते हुए परम पूज्य गुरुदेव का दिव्य साहित्य प्रदान किया।
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अखिल विश्व गायत्री परिवार के आवाहन पर घर घर किया गया यज्ञ
घर घर में में हम यज्ञ रचाएं, आओ भारत सबल बनाएं इसी कामना से आज बुद्ध पूर्णिमा के पावन पर्व पर अखिल विश्व गायत्री परिवार, शांतिकुंज (हरिद्वार) के दिशा निर्देश पर जनपद बलरामपुर के पचपेड़वा, गैं...
अब दर्शन की बारी है, उसे कुछ करने दिया जाए
विज्ञान का तात्पर्य— “प्रकृति के कुछ रहस्यों का उद्घाटन अथवा कुछ उपकरणों का निर्माण कर लेना मात्र नहीं है, वरन् उसकी व्यापकता मानवी दृष्टिकोण को अधिक सुविस्तृत, तथ्यपूर्ण एवं सत्यनिष्ठ ...
धर्म और दर्शन की उत्क्रांति भी आवश्यक
भावी पीढ़ी को मानसिक दिग्भ्रांति से बचाने के लिए यह प्रश्न सुलझाना आवश्यक है। धर्म के गिरते हुए मूल्य को देखकर ऐसा लगता है कि कहीं आने वाली पीढ़ियाँ पूर्णतया पदार्थवादी होकर अपनी आध्यात्मिक शक्तिया...
धर्म और विज्ञान जुड़वाँ भाई
पिछले दिनों धर्म और विज्ञान को विरोधी माना जाता रहा है। दोनों के तर्क, प्रतिपादन और आधार एकदूसरे से भिन्न समझे जाते रहे हैं। एक को प्रत्यक्षवादी और दूसरे को परोक्षवादी कहकर उन्हें असंबद्ध कहा जाता ...
विज्ञान और धर्म में समन्वय अनिवार्य
पदार्थ के रूप में विज्ञान भी आंतरिक सत्ता का ही तो उद्घाटन करता है। धर्म के क्षेत्र में परमात्मा एक विश्वव्यापक शक्ति है और पदार्थ भी शक्ति के ही कण हैं। सच तो यह है कि शक्ति के अतिरिक्त संसार में ...
धर्म की उपेक्षा से पछतावा ही हाथ लगेगा
जीवन उतना जटिल नहीं है, जितना कि बन गया है या बना दिया गया है। हँसी-खुशी की संभावनाओं से वह भरा-पूरा है। शरीर और मन की संरचना इस प्रकार हुई है कि वह बाहर के तनिक से साधनों की सुविधा प्राप्त हो जाने...
धर्म और विज्ञान को मिलकर चलना होगा
धर्म को पूजा-प्रक्रिया तक और विज्ञान को शिल्प व्यवसाय तक सीमित रखा जाए, तो दोनों की गरिमा बढ़ेगी नहीं, गिरेगी ही। दोनों अपंग-अधूरे रह जाएँगे। इन दोनों का परस्पर पूरक होकर रहना उचित ही नहीं, आवश्यक ...
धर्म और विज्ञान के समन्वय में ही कल्याण है
नर और नारी का कार्यक्षेत्र भिन्न है। नारी गृह-व्यवस्था में संलग्न रहती है। गर्भधारण और शिशुपालन यह दोनों काम उसी को करने होते हैं। नर का कार्यक्षेत्र भिन्न है। वह खेत, दफ्तर, कारखाने आदि में ...
ज्ञान ही नहीं, मनुष्य को धर्म भी चाहिए
आत्मा है या नहीं? इसका उत्तर हाँ और ना में दोनों ही तरह दिया जा सकता है। हाँ, उनके लिए ठीक है, जो ज्ञान के आधार पर सूक्ष्म विषयों पर विचार कर सकने और निष्कर्ष निकाल सकने में समर्थ हैं। ना, उनके लिए...
बुद्धि पर धर्म का अंकुश रखा जाए
चेतना के क्षेत्र में मन और बुद्धि का एक क्षेत्र है और श्रद्धा एवं सुसंस्कारिता का दूसरा। मन भौतिक साधनों के सहारे इंद्रियतृप्ति तथा अहंता की पूर्ति चाहता है। अर्थसंचय तथा बड़प्पन प्रदर्शित करने वाल...

