नारी शक्ति की प्रेरक सहभागिता के साथ संपन्न हुआ शिक्षक गरिमा शिविर
गायत्री तीर्थ शांतिकुंज में 29 से 30 मई तक आयोजित दो दिवसीय शिक्षक गरिमा शिविर का समापन उत्साह, प्रेरणा एवं
नवचेतना के वातावरण में सम्पन्न हुआ।
छत्तीसगढ़, उड़ीसा, झारखंड, पश्चिम बंगाल एवं पूर्वोत्तर राज्यों से पधारे शिक्षकों ने शिक्षा को संस्कारों से जोड़ते हुए समाज एवं राष्ट्र निर्माण में अपनी सक्रिय भूमिका निभाने का संकल्प लिया।
समापन सत्र को महिला मंडल अध्यक्षा आदरणीया शेफाली पंड्या दीदी ने संबोधित करते हुए कहा कि शिक्षक और परिवार, दोनों ही समाज निर्माण की महत्वपूर्ण इकाइयाँ हैं। उन्होंने बताया कि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य केवल ज्ञान प्रदान करना नहीं, बल्कि व्यक्तित्व का परिष्कार, चरित्र निर्माण एवं मानवीय मूल्यों का विकास करना है। उन्होंने परम वंदनीया माताजी के जीवन और विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि समाज की प्रगति में महिलाओं की सहभागिता सदैव निर्णायक रही है। परिवार, विद्यालय और समाज में सकारात्मक वातावरण के निर्माण में महिलाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने शिक्षकों से विद्यार्थियों के भीतर संवेदनशीलता, सदाचार, अनुशासन एवं सामाजिक उत्तरदायित्व के संस्कार विकसित करने का आह्वान किया।
उनके उत्साह, समर्पण और संगठनात्मक सहयोग ने पूरे आयोजन को गरिमामय एवं प्रभावशाली बनाया। समापन अवसर पर सभी शिक्षकों को प्रशस्ति प्रमाण-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया।
प्रस्तुत हैं कार्यक्रम के छायाचित्र।
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