"शरीर चला गया, पर चेतना अमर है। विचारों में वे आज भी उतने ही जीवंत हैं, जितने युगसंधि के उस महत्त्वपूर्ण क्षण में थे।"
अखिल विश्व गायत्री परिवार के संस्थापक, युगऋषि, वेदमूर्ति एवं महान आध्यात्मिक युगद्रष्टा परम पूज्य गुरुदेव पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य जी की पुण्यतिथि पर उन्हें कोटिशः श्रद्धांजलि।
पूज्य गुरुदेव का स्मरण केवल श्रद्धा का विषय नहीं, बल्कि युग परिवर्तन एवं आत्मपरिष्कार के संकल्पों को जीवन में उतारने का आह्वान है। उन्होंने अध्यात्म, सेवा, शिक्षा एवं जनजागरण के माध्यम से करोड़ो लोगों के जीवन में चेतना का प्रकाश फैलाया तथा वेद, उपनिषद, पुराण और भारतीय दर्शन के दिव्य ज्ञान को जन-जन तक सरल भाषा में पहुँचाया।
उनका तप, त्याग, चिंतन और युग निर्माण का संदेश आज भी मानवता के लिए मार्गदर्शक दीपस्तंभ बना हुआ है।
आइए, इस पावन अवसर पर हम उनके आदर्शों को आत्मसात करते हुए युग निर्माण के संकल्पों को आगे बढ़ाने का प्रण लें।
"हम पूज्य गुरुदेव के विचारों को जिएँ, उनके कार्यों को पूर्ण करने में अपना योगदान दें और श्रेष्ठ समाज निर्माण की दिशा में सतत अग्रसर रहें।"
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घर घर में में हम यज्ञ रचाएं, आओ भारत सबल बनाएं इसी कामना से आज बुद्ध पूर्णिमा के पावन पर्व पर अखिल विश्व गायत्री परिवार, शांतिकुंज (हरिद्वार) के दिशा निर्देश पर जनपद बलरामपुर के पचपेड़वा, गैं...
अब दर्शन की बारी है, उसे कुछ करने दिया जाए
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धर्म और दर्शन की उत्क्रांति भी आवश्यक
भावी पीढ़ी को मानसिक दिग्भ्रांति से बचाने के लिए यह प्रश्न सुलझाना आवश्यक है। धर्म के गिरते हुए मूल्य को देखकर ऐसा लगता है कि कहीं आने वाली पीढ़ियाँ पूर्णतया पदार्थवादी होकर अपनी आध्यात्मिक शक्तिया...
धर्म और विज्ञान जुड़वाँ भाई
पिछले दिनों धर्म और विज्ञान को विरोधी माना जाता रहा है। दोनों के तर्क, प्रतिपादन और आधार एकदूसरे से भिन्न समझे जाते रहे हैं। एक को प्रत्यक्षवादी और दूसरे को परोक्षवादी कहकर उन्हें असंबद्ध कहा जाता ...
विज्ञान और धर्म में समन्वय अनिवार्य
पदार्थ के रूप में विज्ञान भी आंतरिक सत्ता का ही तो उद्घाटन करता है। धर्म के क्षेत्र में परमात्मा एक विश्वव्यापक शक्ति है और पदार्थ भी शक्ति के ही कण हैं। सच तो यह है कि शक्ति के अतिरिक्त संसार में ...
धर्म की उपेक्षा से पछतावा ही हाथ लगेगा
जीवन उतना जटिल नहीं है, जितना कि बन गया है या बना दिया गया है। हँसी-खुशी की संभावनाओं से वह भरा-पूरा है। शरीर और मन की संरचना इस प्रकार हुई है कि वह बाहर के तनिक से साधनों की सुविधा प्राप्त हो जाने...
धर्म और विज्ञान को मिलकर चलना होगा
धर्म को पूजा-प्रक्रिया तक और विज्ञान को शिल्प व्यवसाय तक सीमित रखा जाए, तो दोनों की गरिमा बढ़ेगी नहीं, गिरेगी ही। दोनों अपंग-अधूरे रह जाएँगे। इन दोनों का परस्पर पूरक होकर रहना उचित ही नहीं, आवश्यक ...
धर्म और विज्ञान के समन्वय में ही कल्याण है
नर और नारी का कार्यक्षेत्र भिन्न है। नारी गृह-व्यवस्था में संलग्न रहती है। गर्भधारण और शिशुपालन यह दोनों काम उसी को करने होते हैं। नर का कार्यक्षेत्र भिन्न है। वह खेत, दफ्तर, कारखाने आदि में ...
ज्ञान ही नहीं, मनुष्य को धर्म भी चाहिए
आत्मा है या नहीं? इसका उत्तर हाँ और ना में दोनों ही तरह दिया जा सकता है। हाँ, उनके लिए ठीक है, जो ज्ञान के आधार पर सूक्ष्म विषयों पर विचार कर सकने और निष्कर्ष निकाल सकने में समर्थ हैं। ना, उनके लिए...
बुद्धि पर धर्म का अंकुश रखा जाए
चेतना के क्षेत्र में मन और बुद्धि का एक क्षेत्र है और श्रद्धा एवं सुसंस्कारिता का दूसरा। मन भौतिक साधनों के सहारे इंद्रियतृप्ति तथा अहंता की पूर्ति चाहता है। अर्थसंचय तथा बड़प्पन प्रदर्शित करने वाल...

