अल्बर्टा की संसद में पहुँचे परम आदरणीय डॉ. चिन्मय पंड्या जी, भारत–कनाडा संबंधों पर हुई सार्थक चर्चा
एडमोंटन, अल्बर्टा (कनाडा)। जन्म शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में चल रहे उत्तर अमेरिका प्रवास के क्रम में परम आदरणीय डॉ. चिन्मय पंड्या जी ने अल्बर्टा प्रांत की संसद का दौरा किया। इस अवसर पर संसद के अधिकारियों ने उनका आत्मीय स्वागत करते हुए उन्हें संसद परिसर का भ्रमण कराया तथा प्रांत की प्रशासनिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों से अवगत कराया।
भ्रमण के दौरान परम आदरणीय डॉ. पंड्या जी एवं संसद अधिकारियों के मध्य भारत और कनाडा के मध्य सांस्कृतिक, सामाजिक एवं मानवीय मूल्यों पर आधारित संबंधों को और अधिक सुदृढ़ बनाने के विषय में सार्थक चर्चा हुई। संवाद के दौरान भारतीय संस्कृति, वैश्विक सद्भावना, शिक्षा एवं समाजोत्थान से जुड़े विभिन्न विषयों पर विचारों का आदान-प्रदान किया गया।
उल्लेखनीय है कि परम आदरणीय डॉ. चिन्मय पंड्या जी के सामाजिक, शैक्षिक एवं सांस्कृतिक योगदानों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहना प्राप्त हो रही है। हाल ही में कनाडा के अल्बर्टा एवं ओंटारियो प्रांतों की सरकारों द्वारा उन्हें आधिकारिक रूप से सम्मानित किया गया है। यह सम्मान मानवता के उत्थान, सांस्कृतिक जागरण तथा वैश्विक स्तर पर सकारात्मक परिवर्तन के लिए किए जा रहे उनके सतत प्रयासों की अंतरराष्ट्रीय स्वीकृति का प्रतीक है।
यह अवसर भारतीय संस्कृति एवं मानवीय मूल्यों के वैश्विक प्रसार की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम सिद्ध हुआ। उपस्थित सभी गणमान्य व्यक्तियों ने भविष्य में भी ऐसे संवाद एवं सहयोग को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता व्यक्त की।
Recent Post
अखिल विश्व गायत्री परिवार के आवाहन पर घर घर किया गया यज्ञ
घर घर में में हम यज्ञ रचाएं, आओ भारत सबल बनाएं इसी कामना से आज बुद्ध पूर्णिमा के पावन पर्व पर अखिल विश्व गायत्री परिवार, शांतिकुंज (हरिद्वार) के दिशा निर्देश पर जनपद बलरामपुर के पचपेड़वा, गैं...
अब दर्शन की बारी है, उसे कुछ करने दिया जाए
विज्ञान का तात्पर्य— “प्रकृति के कुछ रहस्यों का उद्घाटन अथवा कुछ उपकरणों का निर्माण कर लेना मात्र नहीं है, वरन् उसकी व्यापकता मानवी दृष्टिकोण को अधिक सुविस्तृत, तथ्यपूर्ण एवं सत्यनिष्ठ ...
धर्म और दर्शन की उत्क्रांति भी आवश्यक
भावी पीढ़ी को मानसिक दिग्भ्रांति से बचाने के लिए यह प्रश्न सुलझाना आवश्यक है। धर्म के गिरते हुए मूल्य को देखकर ऐसा लगता है कि कहीं आने वाली पीढ़ियाँ पूर्णतया पदार्थवादी होकर अपनी आध्यात्मिक शक्तिया...
धर्म और विज्ञान जुड़वाँ भाई
पिछले दिनों धर्म और विज्ञान को विरोधी माना जाता रहा है। दोनों के तर्क, प्रतिपादन और आधार एकदूसरे से भिन्न समझे जाते रहे हैं। एक को प्रत्यक्षवादी और दूसरे को परोक्षवादी कहकर उन्हें असंबद्ध कहा जाता ...
विज्ञान और धर्म में समन्वय अनिवार्य
पदार्थ के रूप में विज्ञान भी आंतरिक सत्ता का ही तो उद्घाटन करता है। धर्म के क्षेत्र में परमात्मा एक विश्वव्यापक शक्ति है और पदार्थ भी शक्ति के ही कण हैं। सच तो यह है कि शक्ति के अतिरिक्त संसार में ...
धर्म की उपेक्षा से पछतावा ही हाथ लगेगा
जीवन उतना जटिल नहीं है, जितना कि बन गया है या बना दिया गया है। हँसी-खुशी की संभावनाओं से वह भरा-पूरा है। शरीर और मन की संरचना इस प्रकार हुई है कि वह बाहर के तनिक से साधनों की सुविधा प्राप्त हो जाने...
धर्म और विज्ञान को मिलकर चलना होगा
धर्म को पूजा-प्रक्रिया तक और विज्ञान को शिल्प व्यवसाय तक सीमित रखा जाए, तो दोनों की गरिमा बढ़ेगी नहीं, गिरेगी ही। दोनों अपंग-अधूरे रह जाएँगे। इन दोनों का परस्पर पूरक होकर रहना उचित ही नहीं, आवश्यक ...
धर्म और विज्ञान के समन्वय में ही कल्याण है
नर और नारी का कार्यक्षेत्र भिन्न है। नारी गृह-व्यवस्था में संलग्न रहती है। गर्भधारण और शिशुपालन यह दोनों काम उसी को करने होते हैं। नर का कार्यक्षेत्र भिन्न है। वह खेत, दफ्तर, कारखाने आदि में ...
ज्ञान ही नहीं, मनुष्य को धर्म भी चाहिए
आत्मा है या नहीं? इसका उत्तर हाँ और ना में दोनों ही तरह दिया जा सकता है। हाँ, उनके लिए ठीक है, जो ज्ञान के आधार पर सूक्ष्म विषयों पर विचार कर सकने और निष्कर्ष निकाल सकने में समर्थ हैं। ना, उनके लिए...
बुद्धि पर धर्म का अंकुश रखा जाए
चेतना के क्षेत्र में मन और बुद्धि का एक क्षेत्र है और श्रद्धा एवं सुसंस्कारिता का दूसरा। मन भौतिक साधनों के सहारे इंद्रियतृप्ति तथा अहंता की पूर्ति चाहता है। अर्थसंचय तथा बड़प्पन प्रदर्शित करने वाल...

