तप, त्याग और लोकमंगल की प्रेरणा से राष्ट्र के नवसृजन का आह्वान, जन्मशताब्दी समारोह में गूँजे युगनिर्माण के संकल्प
नई दिल्ली। परम वंदनीया माता भगवती देवी शर्मा जी की जन्मशताब्दी एवं अखण्ड दीप शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित ‘सुनो, आ गई जन्मशताब्दी’ कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथियों के प्रेरणादायी उद्बोधनों ने आध्यात्मिक चेतना, मानवीय मूल्यों एवं राष्ट्रनिर्माण के संकल्पों को नई अभिव्यक्ति प्रदान की।
इस ऐतिहासिक अवसर पर परम वंदनीया माताजी की मातृसुलभ करुणा, साधनामय जीवन एवं निःस्वार्थ समर्पण का स्मरण करते हुए देव संस्कृति विश्वविद्यालय के उपाध्यक्ष आदरणीय डॉ. चिन्मय पंड्या जी ने युगनिर्माण के व्यापक उद्देश्य को जन-जन तक पहुँचाने की प्रेरणा दी। उन्होंने इस शताब्दी वर्ष को केवल एक उत्सव के रूप में नहीं, अपितु पूज्य गुरुसत्ता के विचारों को जीवन में उतारने, समाज में संवेदनाओं का विस्तार करने तथा राष्ट्र के उज्ज्वल भविष्य हेतु सामूहिक पुरुषार्थ का अवसर बनाने का संदेश दिया।
माननीय लोकसभा अध्यक्ष श्री ओम बिरला जी ने अपने उद्बोधन में पूज्य गुरुदेव की शतवर्षीय तप-साधना, अखण्ड दीप के दिव्य प्रकाश तथा परम वंदनीया माताजी के त्याग, सेवा एवं लोकमंगल के प्रति समर्पित जीवन को भारतीय आध्यात्मिक परंपरा की अमूल्य धरोहर बताया। उन्होंने विशेष रूप से माताजी के नेतृत्व में संचालित नारी जागरण अभियान का उल्लेख करते हुए कहा कि उनका जीवन-दर्शन आज भी महिला सशक्तीकरण, चरित्र निर्माण, मूल्यपरक शिक्षा एवं सामाजिक समरसता की प्रेरणा देता है।
केंद्रीय मंत्री श्री ज्योतिरादित्य सिंधिया जी ने अपने संबोधन में कहा कि पूज्य गुरुदेव एवं परम वंदनीया माताजी की प्रेरणा से अखिल विश्व गायत्री परिवार आध्यात्मिक चेतना के माध्यम से व्यक्ति, परिवार, समाज एवं राष्ट्र के नवनिर्माण में निरंतर संलग्न है। उन्होंने सेवा, श्रद्धा एवं मानवीय संवेदनाओं से समूची विश्व मानवता को अभिसिंचित करने वाली परम वंदनीया माताजी के सम्मान में स्मारक डाक टिकट जारी किए जाने को गौरवपूर्ण अवसर बताया।
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