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Magazine - Year 1956 - Version 2

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तपोभूमि—समाचार

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1—गायत्री महायज्ञ की पूर्णाहुति की तैयारियाँ पूरी तत्परता से चल रही हैं। अनेक कार्य निपटाये जा चुके हैं, अनेक कार्य हाथ में हैं, जो कार्य अभी तक किन्हीं कठिनाइयों के कारण आरम्भ नहीं किये गये उन्हें शीघ्र ही आरम्भ करने का विचार है। नियत समय तक सब कार्य पूरे हो जाने की आशा की जा रही है।

2-चैत्र की नवरात्रि ता.12 अप्रैल से आरम्भ की जायगी। जिन्हें अवकाश है तथा जो पूर्णाहुति के कार्यों में हाथ बटावेंगे वे नवरात्रि से एक दो दिन पहले ही आ जावें। उन दिनों 28 हजार का एक अनुष्ठान कराना, यज्ञ में भाग लेना तथा व्यवस्था सम्बन्धी कार्यों में हाथ बटाना उनके लिये संभव होगा। जो परिजन पूर्णाहुति से पूर्व आना चाहते हैं वह अपने आने की पूर्व सूचना देंगे, ताकि कार्यकर्ताओं की संख्या का पूर्व आभास हो सके।

3—चैत्र सुदी 15 को पूर्णाहुति समाप्त होते ही, सांस्कृतिक शिक्षा शिविर प्रारम्भ हो जायगा, जिसका विस्तृत विवरण पिछले पृष्ठों पर छपा है। यह शिविर सप्ताह चलकर जेष्ठ सुदी 10 गायत्री जयन्ती को समाप्त होगा। आवश्यक विषयों का शिक्षण पूरे परिश्रम पूर्वक होगा। शिविर में भाषण देने के लिए बाहर के विद्वान भी आमंत्रित किये जावेंगे। जो व्यक्ति इस शिक्षा शिविर में 7 सप्ताह ठहरना चाहें वे भी अपने निश्चय की पूर्व सूचना दे दें। ताकि उनके ठहरने, भोजन आदि की व्यवस्था का नियन्त्रण किया जाय।

4—अगले वर्ष बड़े साँस्कृतिक सम्मेलनों के साथ स्थान-स्थान पर 108 गायत्री महायज्ञ कराने की योजना की जाय। जहाँ के उपासकों में उत्साह हो वे अपने यहाँ के लोगों से परामर्श करके आवें और पूर्णाहुति के समय मथुरा में अपने निश्चय की सूचना दे दें। यहाँ से उनके कार्य को सफल बनाने के लिए कुछ सुविधाओं का प्रबन्ध किया जायगा।

5. अनेक व्यक्ति घर से ‘रिटायर’ होकर तीर्थवास तथा तप, भजन का विचार किया करते हैं। ऐसे अनेक व्यक्ति तथा उनके पत्र यहाँ आते रहते थे। अब तक स्थान सम्बन्धी असुविधा होने के कारण किसी को स्वीकृति नहीं दी जा रही थी, अब नये 7 कमरे बन जाने से वह कठिनाई हल हो गई है। गुण,कर्म स्वभाव को देखकर अब इस प्रकार की इच्छा करने वाले व्यक्तियों को तपोभूमि में रहने की स्वीकृति दी जा सकेगी। इतना जप,तप यज्ञ हो चुकने के कारण तथा प्राचीन काल से ऋषियों की तपोभूमि रहने के कारण इस स्थान में तप भजन में अभीष्ट सफलता की पूरी संभावना है। साधन में पथ प्रदर्शन,नित्य यज्ञ में सम्मिलित होने का लाभ, धर्म ग्रन्थों के स्वाध्याय के लिए विशाल पुस्तकालय, सत्संग,साँस्कृतिक शिक्षा आदि के अनेक लाभ ऐसे हैं जो अन्यत्र कठिनाई से ही मिल सकते हैं। जो यहाँ निवास करना चाहें वे पत्र व्यवहार एवं परामर्श कर लें।

6—साँस्कृतिक पुनरुत्थान कार्यक्रम को देश व्यापी बनाने के लिए हर धर्मप्रेमी का श्रम तथा समय लगना चाहिए। अखंड ज्योति के पाठकों से प्रार्थना है कि कुछ समय इन कार्यों के लिए भी निकालें ! नैतिक सुस्थिरता का वातावरण तैयार करने के लिए सच्चा मन और सच्चा श्रम ही ईंट चूने की तरह काम दे सकता है। साँस्कृतिक सेवा शृंखला की तीन श्रेणियों में से किसी न किसी में हम में से हर एक को सम्मिलित होना चाहिए।

7—पूर्णाहुति के अवसर पर गायत्री तपोभूमि में विधिवत् यज्ञोपवीत एवं गायत्री मन्त्र लेने वालों के लिए 20 अप्रैल निश्चित की गई है। इस प्रयोजन के लिए एक दिन पूर्व ता. 19 को मथुरा पहुँच जाना आवश्यक है।

8—प्रत्येक प्रेमी से प्रार्थना है कि इसी अंक में पृष्ठ 35 पर छपे हुए साँस्कृतिक कार्यक्रम को दो बार ध्यान पूर्वक पढ़े और उस सफल बनाने के लिए अपने विचार एवं सुझाव हमें लिखें।

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