सफल मनुष्य जीवन
विचारों में हम उठते हैं और विचारों से ही गिरते हैं। उनसे ही खड़े होते हैं और उनसे ही चलते हैं। उनकी जबरदस्त शक्ति से सबका भाग्य बनता है। जो आदमी अपने विचार का स्वामी बनकर रहता है, जो आदमी इच्छाओं को अपने वश में रखता है और जो प्रेमपूर्ण सचाई के तथा साहस भरे विचार करता है वह अपने आदर्श को सत्य के प्रकाश में ढूंढ़ लेता है।
तुम्हारे जीवन के जो क्षण व्यतीत हो रहे हैं उनको सादे, मधुर, पवित्र, सुन्दर, श्रेष्ठ आशापूर्ण, उच्च तथा नम्र विचारों से भरो। वे विचार तुम्हारे जीवन क्षेत्र में अपने अनुरूप फल पैदा करेंगे फल। स्वरूप तुम्हारा दैनिक जीवन आन्तरिक शुभ विचारों का जीता जागता चित्र बन जायेगा। ऐसा जीवन ही ‘सफल मनुष्य जीवन’ होता है।
पं श्रीराम शर्मा आचार्य
अखण्ड ज्योति दिसम्बर 1940 पृष्ठ 13
Recent Post
कृपा-कथा : एक शिष्य की कलम से परम वंदनीया माता जी जगन्माता माँ जगदंबा हैं
परम वंदनीया माता जी मेरे लिए केवल एक श्रद्धेय व्यक्तित्व नहीं, बल्कि साक्षात् जगन्नमाता—मां जगदंबा की अवतारी चेतना हैं। यह मेरा अटूट, अडिग और जीवनानुभव से उपजा विश्...
कृपा-कथा : एक शिष्य की कलम से | गुरु ने उँगली पकड़ ली, फिर लोक-परलोक वही देखते है
गुरुदेव ने कहा - तुम्हारी कई पीढ़ियाँ मेरा कार्य करेगी। से आगे .....
किसी संत ने कहा है— जिसकी उँगली गुरु ने पकड़ ली, उसके लिए लोक और परलोक दोनों सुरक्षित हो जाते ह...
कृपया कथा : एक शिष्य की कलम से गुरुदेव ने कहा - तुम्हारी कई पीढ़ियाँ मेरा कार्य करेगी।
मेरे नाना जी स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय भूमिका निभाते थे, जिसके कारण उन्हें गिरफ्तार कर आसनसोल जेल में बंदी बना दिया गया।
जेल के बैरक में प्रवेश करते ही एक दुबला-पतला किंतु ऊँची क...
शताब्दी नगर से पाषाणों का मौन संदेश
अवतारी सत्ता जब धरती पर अवतरित होती है, तब सृष्टि के जड़–चेतन सभी उसके सहयोगी और अनुयायी बनकर अपने सौभाग्य को उससे जोड़ लेते हैं। ऐसा ही एक अद्भुत दृश्य इन दिनों हरिद्वार के वैरागी द्वीप पर, ...
कृपा कथा : एक शिष्य की कलम से । भक्ति की निर्झरिणी फूटती थी वंदनीया माता जी के गीतों से
"मेरे तो गिरधर गोपाल, दूसरो न कोई.." — मीराबाई की ये अमर पंक्तियाँ अनन्य कृष्ण-भक्ति, विरह और आत्मविसर्जन का साक्षात प्रतीक हैं। कहा जाता है कि मीरा जब गा...
कृपा कथा : एक शिष्य की कलम से चिकित्सा विज्ञान नतमस्तक हुआ माता जी की कृपया के आगे
वर्ष 1994 के आरंभ का समय था। शांतिकुंज के कैंटीन के समीप स्थित खुले मैदान में समयदानी भाई पूरे उत्साह से कबड्डी खेल रहे थे। वातावरण में युवापन, ऊर्जा और आत्मीयता घुली हुई थी। उन्हें खेलते देख मेरा ...
दिव्य अखंड दीप शताब्दी समारोह: शताब्दी नगर का पथ: साधना और संकल्प का प्रतीक
दिव्य अखंड दीप शताब्दी समारोह की मौन तैयारी
परम वंदनीया माता जी एवं दिव्य अखंड दीप शताब्दी समारोह में पधारने वाली विभूतियों के स्वागत हेतु जिस पथ का निर्माण हो रहा है, वह केवल पत्थर और रेत ...
कृपा कथा: एक शिष्य की कलम से वंदनीया माता जी की कृपा का चमत्कार
परम वंदनीया माता जी की दिव्य वाणी से उद्घोषित देवसंस्कृति दिग्विजय अभियान के अंतर्गत चलाए जा रहे अश्वमेध महायज्ञों की शृंखला गुजरात के वरोडा तक पहुँच गई। मैं और मेरे जैसे हजारों कार्यकर्ता इस...
जब नेतृत्व स्नेह बनकर सामने आता है शताब्दी नगर में पीढ़ियों का आत्मीय संगम
जब नेतृत्वकर्ता अपने सहयोगियों और साधकों के सुख–दुःख, सुविधा–अभाव तथा गर्मी–सर्दी की चिंता करते हुए अचानक उनके बीच उपस्थित हो जाएँ, तो थकान स्वतः ही विलीन हो जाती है और चेहरे पर स...
पूज्य गुरुदेव की लेखनी साहित्य ही नहीं भाग्य भी रचती है
कुछ व्यक्तित्व केवल इतिहास नहीं रचते, वे जीवन गढ़ते हैं। पूज्य गुरुदेव पं. श्रीराम शर्मा आचार्य जी ऐसे ही दिव्य अवतारी पुरुष थे, जिनकी लेखनी, दृष्टि और आशीर्वाद से असंख्य जीवनों की धारा बदल गई। यह ...
