जामवंत-हनुमान की तरह गुरूकार्य में जुट जायें हम
आदरणीय डॉ. चिन्मय पण्ड्या जी अमरकंटक की दिव्य भूमि पर बने शक्तिपीठ में परिजनों को संबोधित करते हुए अत्यंत भावविभोर थे। उन्होंने परिजनों को साक्षात शिव-पार्वती के स्वरूप परम पूज्य गुरूदेव, परम वंदनीया माताजी के साथ संबंधों की महत्ता और उनके प्रति आत्मसमर्पण का महत्त्व समझाया। उन्होंने कहा कि हम उस महान सत्ता से जुड़े हैं, जो सारी दुनिया को निहाल कर रही है। हमें उनके मानसपुत्र होने का गौरव बोध होना चाहिए। उनके सूक्ष्म संरक्षण के आश्वासन पर दृढ़ विश्वास रखते हुए जितना संभव हो, अपने समय, सम्पदा, प्रतिभा और विभूतियों को उनके कार्य के लिए समर्पित कर देने में पीछे नहीं रहना चाहिए। इस अवसर पर उन्होंने सभी को नववर्ष 2024 की शुभकामनाएँ देते हुए जामवंत और हनुमान की तरह गुरूकार्य में जुट जानेका आह्वान किया।
मरवाही एवं पेण्ड्रा में: अमरकंटक के बाद आद. डॉ. चिन्मय जी निकटवर्ती छत्तीसगढ़ के शहर मरवाही एवं पेण्ड्रा पहुँचे, वहाँ के
कार्यकर्त्ताओं-परिजनों को युगतीर्थ की प्रखर प्राण ऊर्जा से लाभान्वित किया।
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