अंतर्राष्ट्रीय प्रतिनिधि मंडल पहुंचा देसंविवि युवा आइकान से आध्यात्मिक व सांस्कृतिक विषयों पर हुई चर्चा
हरिद्वार 12 मार्च।
आध्यात्मिक नेता प्रेम बाबा के नेतृत्व में ब्राजील, अर्जेंटीना, आयरलैंड, इटली और स्पेन से 70 सदस्यीय अंतर्राष्ट्रीय प्रतिनिधिमंडल देव संस्कृति विश्वविद्यालय हरिद्वार पहुँचा। प्रतिनिधिमंडल की यात्रा का उद्देश्य वैश्विक आध्यात्मिक और सांस्कृतिक आदान-प्रदान एवं सार्वभौमिक सद्भाव की खोज में विविध परंपराओं को एकजुट करना है। अंतर्राष्ट्रीय प्रतिनिधि मंडल ने देवसंस्कृति विवि के गौशाला, स्वावलंबन कार्यशाला, स्मृति उपवन सहित विभिन्न प्रकल्पों का अध्ययन किया एवं प्रज्ञेश्वर महादेव में पूजा अर्चना की और सांस्कृतिक विरासत को विस्तारित करने हेतु प्रार्थना की।
प्रतिनिधि मण्डल ने देसंविवि के प्रतिकुलपति युवा आइकान डॉ चिन्मय पण्ड्या से भेंट की और आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक विषयों पर विस्तृत चर्चा की। इस दौरान युवा आइकान ने युगऋषि पं श्रीराम शर्मा आचार्य जी की कालातीत शिक्षाओं को साझा किया। उन्होंने कहा कि परम पूज्य आचार्यश्री ने अपनी आध्यात्मिक, सांस्कृतिक विचारों को जन-जन में सुलभ बनाने के उद्देश्य से सरलतम उपाय बताया है, जो समाज के सभी वर्ग के लिए उत्तम है। युवा आइकान ने कहा कि परम पूज्य आचार्यश्री ने अपनी शिक्षाओं के माध्यम से समाज में जागरूकता और शांति फैलाने के लिए कई महत्वपूर्ण पहल की हैं। इस दौरान युवा आइकान ने प्रतिनिधि मण्डल को प्रतीक चिह्न, युग साहित्य आदि भेंटकर सम्मानित किया।
प्रतिनिधि मण्डल ने विवि द्वारा समाज में सकारात्मक बदलाव लाने तथा प्रेम, शांति और आंतरिक परिवर्तन को बढ़ावा देने के लिए किए जा रहे प्रयास की सराहना की। इस यात्रा का उद्देश्य सभी देशों के बीच सांस्कृतिक और आध्यात्मिक आदान-प्रदान को बढ़ाने और अलग-अलग परंपराओं को एक-दूसरे तक पहुंचाने के लिए है। प्रसिद्ध प्रेम बाबा का समूह आध्यात्मिकता की शक्ति के माध्यम से व्यक्तियों और समाजों को सशक्त बनाने के देसंविवि से जुड़ा हुआ है।
Recent Post
हमारी वसीयत और विरासत (भाग 157):आत्मीयजनों से अनुरोध एवं उन्हें आश्वासन
कहने को गायत्री परिवार, प्रज्ञा परिवार आदि नाम रखे गए हैं और उनकी सदस्यता का रजिस्टर तथा समयदान-अंशदान का अनुबंध भी है, पर वास्तविकता दूसरी ही है, जिसे हम सब भली भाँति अनुभव भी करते हैं। वह है&mdas...
हमारी वसीयत और विरासत (भाग 156):आत्मीयजनों से अनुरोध एवं उन्हें आश्वासन
साधना से उपलब्ध अतिरिक्त सामर्थ्य को विश्व के मूर्द्धन्य वर्गों को हिलाने-उलटने में लगाने का हमारा मन है। अच्छा होता सुई और धागे को आपस में पिरो देने वाले कोई सूत्र मिल जाते; अन्यथा सर्वथा अपरिचित ...
हमारी वसीयत और विरासत (भाग 155):तीन संकल्पों की महान् पूर्णाहुति
हमने जैसा कि इस पुस्तक में समय-समय पर संकेत किया है। जैसे हमारे बॉस के आदेश मिलते रहे हैं, वैसे ही हमारे संकल्प बनते, पकते व फलित होते गए हैं। सन् 1986 वर्ष का उत्तरार्द्ध हमारे जीवन का महत्त्वपूर्...
हमारी वसीयत और विरासत (भाग 154): जीवन के उत्तरार्द्ध के कुछ महत्त्वपूर्ण निर्धारण
परिवर्तन और निर्माण दोनों ही कष्टसाध्य हैं। भ्रूण जब शिशुरूप में धरती पर आता है, तो प्रसवपीड़ा के साथ होने वाला खून-खच्चर दिल दहला देता है। प्रस्तुत परिस्थितियों के दृश्य और अदृश्य दोनों ही पक्ष ऐसे...
विशिष्ट सामायिक चिंतन: कृत्रिम बुद्धिमत्ता (ए.आई.) एवं शिक्षा
आज जीवन के हर क्षेत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता अर्थात ए०आई० (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) का बोलबाला है। ए०आई० समाचार की सुर्खियों से आगे जीवन के हर पक्ष का हिस्सा बनती जा रही है। स्वास्थ्य, कृषि, बैंकिं...
हमारी वसीयत और विरासत (भाग 153): जीवन के उत्तरार्द्ध के कुछ महत्त्वपूर्ण निर्धारण
कार्यक्रमों में प्रचारात्मक, रचनात्मक और सुधारात्मक अनेक कार्य हैं, जिन्हें घर से बाहर रहते हुए परिस्थितियों के अनुरूप कार्यान्वित किया जा सकता है। प्रचारात्मक स्तर के कार्य— 1. झोला पुस्तकाल...
हमारी वसीयत और विरासत (भाग 152): जीवन के उत्तरार्द्ध के कुछ महत्त्वपूर्ण निर्धारण
माना कि आज स्वार्थपरता, संकीर्णता और क्षुद्रता ने मनुष्य को बुरी तरह घेर रखा है, तो भी इस धरती को वीर विहीन नहीं कहा जा सकता। 60 लाख साधु-बाबा यदि धर्म के नाम पर घर-बार छोड़कर मारे-मारे फिर सकते हैं...
विज्ञान को शैतान बनने से रोकें:अनियंत्रित प्रगति अर्थात महामरण की तैयारी
सामान्य व्यक्ति का मस्तिष्क विकृत हो तो वह थोड़े ही व्यक्तियों का अहित कर सकता है। उसी तरह की दुर्बुद्धि वाले लोगों का एक समूह निकल पड़े, तो हानि की सँभावनाएँ निश्चित बढ़ती हैं। किंतु यदि यही रोग र...
होली
होली विशेषांक— 4
पुराणकालीन, आदर्शसत्याग्रही, भक्त प्रह्लाद के दमन के लिए हिरण्यकश्यप के छल-प्रपंच सफल न हो सके। उसे भस्म करने के प्रयास में होलिका जल मरी और प्रहलाद तपे कंचन बन गए। ख...
अपनों से अपनी बात- होली का संदेश
होली विशेषांक— 3
मातृभूमि की धूलि मस्तक पर लगाकर देशभक्ति की प्रतिज्ञा लेने का महापर्व है— होली। यह असमानता के अभिशाप को जला देने का पर्व भी है। यह पर्व यह संदेश देता है कि आर्थिक...

.jpg)
