बैरागी द्वीप पर वसुधा वंदन एवं भूमि पूजन से शताब्दी वर्ष की दिव्य तैयारी का शुभारंभ
हरिद्वार के समस्त पावन तीर्थस्थलों से एकत्रित दिव्य तीर्थ-रज के साथ आज बैरागी द्वीप पर “वसुधा वंदन (तीर्थ-रज पूजन) एवं भूमि पूजन समारोह” अत्यंत श्रद्धा, उत्साह और आध्यात्मिक ऊर्जा के साथ संपन्न हुआ। इससे जन्म शताब्दी एवं अखंड दीप शताब्दी वर्ष 2026 की भव्य तैयारियों का शुभारंभ हुआ।
यह अलौकिक अनुष्ठान भारत की प्राचीन तीर्थ परंपरा, साधना-संस्कृति और आध्यात्मिक चेतना का अद्भुत संगम बनकर उभरा।
इस पवित्र आयोजन का संचालन एवं मार्गदर्शन दल-नायक के रूप में देव संस्कृति विश्वविद्यालय के प्रति-कुलपति एवं अखिल विश्व गायत्री परिवार के युवा प्रतिनिधि आदरणीय डॉ. चिन्मय पण्ड्या जी के सान्निध्य में हुआ।
जन्म शताब्दी वर्ष—परम वंदनीया माताजी भगवती देवी शर्मा जी की 100वीं जयंती तथा दिव्य अखंड दीप के प्राकट्य के 100 वर्ष—के ये पुण्य अवसर केवल स्मरण भर नहीं, बल्कि मानवता को संस्कार, साधना और समन्वय की दिशा में जाग्रत करने वाले ऐतिहासिक पर्व हैं। आज का यह तीर्थ-रज पूजन उसी युग-प्रारंभ की पावन प्रस्तावना है।
इस अवसर पर माननीय राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह जी, जगतगुरु शंकराचार्य श्री राजराजेश्वरानंद जी महाराज, संगठन महामंत्री श्री शिव प्रकाश जी, उत्तर प्रदेश के माननीय परिवहन मंत्री श्री दयाशंकर सिंह जी, राज्य के वरिष्ठ नेता श्री मदन कौशिक जी, प्रसिद्ध शिक्षाविद एवं युवा प्रेरक श्री आदित्य कोठारी जी तथा हरिद्वार की मेयर श्रीमती किरण जी ने अपनी सौम्य उपस्थिति से कार्यक्रम की गरिमा बढ़ाई। बड़ी संख्या में गायत्री साधक, प्रतिनिधि एवं श्रद्धालु भी उपस्थित रहे।
आदरणीय डॉ. पण्ड्या जी ने अपने संदेश में कहा कि “हरिद्वार के तीर्थों की यह पावन रज युगों से संचित तप, त्याग, साधना और संस्कृति की ऊर्जा संजोए हुए है। आने वाला शताब्दी वर्ष ‘लोकमंगल’ और ‘सांस्कृतिक चेतना के जागरण’ को आधार बनाकर विश्व में नई प्रेरणा जगाएगा।”
आज का यह दिव्य क्षण केवल एक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आने वाले ऐतिहासिक शताब्दी-वर्ष के आध्यात्मिक दीप-प्रज्वलन का पावन उद्घोष है।
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