251 कुण्डीय गायत्री महायज्ञ की पूर्णाहुति पर हसौद पहुँचे आदरणीय डॉ. चिन्मय पंड्या जी, परिजनों में भरा नव उत्साह**
।छत्तीसगढ़ प्रवास।
12 दिसम्बर, हसौद
चार दिवसीय छत्तीसगढ़ प्रवास के दौरान आदरणीय डॉ. चिन्मय पंड्या जी पुनः माँ महामाया की पावन नगरी हसौद पधारे। यहाँ आयोजित 251 कुण्डीय गायत्री महायज्ञ की पूर्णाहुति के अवसर पर वे मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित हुए। उनकी गरिमामय उपस्थिति ने सभी परिजनों में नई ऊर्जा और उत्साह का संचार कर दिया।
परिजनों को संबोधित करते हुए आदरणीय डॉ. चिन्मय पंड्या जी ने कहा— “जब इच्छा के साथ शक्ति जुड़ती है, तभी संकल्प बनता है, और संकल्प का कोई विकल्प नहीं होता।” उन्होंने आगे कहा कि आने वाला समय अखिल विश्व गायत्री परिवार के लिए तीन रूपों से अत्यंत महत्वपूर्ण है—
1. परम वंदनीया माताजी की जन्म-शताब्दी,
2. अखंड दीपक के प्रज्ज्वलित होने के 100 वर्ष,
3. पूज्य गुरुदेव के तप-शताब्दी वर्ष।
ऐसे ऐतिहासिक अवसर पर, हम सभी की इच्छा-शक्ति इतनी प्रबल होनी चाहिए कि उससे निकला संकल्प अडिग और विकल्परहित हो।
आदरणीय डॉ. साहब ने सभी परिजनों से आग्रह किया कि वे आगामी विशाल कार्यक्रमों की तैयारी में पूर्ण उत्साह और समर्पण के साथ जुट जाएँ तथा उनकी सफलतापूर्वक संपन्नता में अपना योगदान दें।
कार्यक्रम के अंत में हसौद आयोजक मंडल की पूरी टीम द्वारा आदरणीय डॉ. चिन्मय पंड्या जी को स्मृति-चिह्न भेंट कर सम्मानित करते हुए डॉ. साहब के आगमन पर अपनी प्रसन्नता व्यक्त की गई।
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