108 कुण्डीय दीपमहायज्ञ में बगीचा पहुँचे आदरणीय डॉ. चिन्मय पंड्या जी, दिव्य उद्बोधन से जागृत हुई चेतना
चार दिवसीय छत्तीसगढ़ प्रवास के अंतिम चरण में देव संस्कृति विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति आदरणीय डॉ. चिन्मय पंड्या जी जशपुर जिले के बगीचा ग्राम में आयोजित 108 कुण्डीय दीपमहायज्ञ में ससम्मान पधारे। इस पावन अवसर पर उनका उद्बोधन अत्यंत प्रेरणादायी, आत्मस्पर्शी एवं चेतना जाग्रत करने वाला रहा।
अपने ओजस्वी विचारों के माध्यम से उन्होंने मानव के भीतर देवत्व के जागरण, समाज में सद्भाव, संस्कार और नैतिक चेतना के विस्तार का सशक्त संदेश प्रदान किया। दीपों की दिव्य ज्योति के मध्य उनका मार्गदर्शन उपस्थित जनसमूह के लिए आध्यात्मिक ऊर्जा और नवचेतना का स्रोत बना।
कार्यक्रम की गरिमा को और अधिक ऊँचाई प्रदान करते हुए मंच पर विशिष्ट अतिथि के रूप में छत्तीसगढ़ के माननीय मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय जी की धर्मपत्नी श्रीमती कौशल्या साय जी का ससम्मान आगमन हुआ। उनकी गरिमामयी उपस्थिति ने आयोजन को विशेष गौरव एवं सम्मान से अलंकृत किया।
यह दीपमहायज्ञ केवल एक धार्मिक अनुष्ठान न होकर समाज में प्रकाश, संस्कार और चेतना के विस्तार का जीवंत प्रतीक बनकर उभरा। कार्यक्रम के समापन अवसर पर आदरणीय डॉ. चिन्मय पंड्या जी ने श्रीमती कौशल्या साय जी को गुरुदेव का साहित्य भेंट कर जन्मशताब्दी वर्ष 2026 के पावन अवसर पर हरिद्वार पधारने का स्नेहपूर्ण आमंत्रण प्रदान किया।
इसके उपरांत डॉ. पंड्या जी एवं आदरणीय श्रीमती कौशल्या साय जी ने कार्यक्रम स्थल पर भोजनालय में जाकर वहां उपस्थित बस्तर जिले से पधारे भोजनालय परिवार के परिजनों से आत्मीय भेंट-वार्ता कर उनका उत्साहवर्धन किया।
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