शताब्दी समारोह के अंतर्गत शताब्दी नगर में प्रखर प्रज्ञा–सजल श्रद्धा स्थापना का भव्य समारोह संपन्न
परम वन्दनीया माता भगवती देवी शर्मा जी के शताब्दी समारोह एवं अखण्ड दीपक शताब्दी वर्ष कार्यक्रमों की श्रृंखला के अंतर्गत आज दिनांक 16 दिसंबर 2025 को शताब्दी नगर, बैरागी कैंप के पावन प्रांगण में प्रखर प्रज्ञा–सजल श्रद्धा स्थापना समारोह - श्रद्धा, साधना एवं गरिमामय वातावरण में भव्य कार्यक्रम सम्पन्न हुआ।
इस अवसर पर शताब्दी समारोह के दल नायक आदरणीय डॉ. चिन्मय पंड्या जी के कर-कमलों से कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। इस भव्य समारोह में जिलाधिकारी, हरिद्वार श्री मयूर दीक्षित जी, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक हरिद्वार श्री प्रमेन्द्र डोभाल जी, , श्री अरविंद आश्रम के प्रमुख स्वामी ब्रह्मदेव जी तथा रामकृष्ण मिशन के प्रमुख संन्यासी स्वामी दयामृतानंद जी की गरिमामयी उपस्थिति रही।
आदरणीय डॉ. चिन्मय पंड्या जी ने शताब्दी वर्ष के मूल भाव को रेखांकित करते हुए कहा कि प्रखर प्रज्ञा और सजल श्रद्धा का समन्वय ही व्यक्ति के अंतःकरण को परिष्कृत कर समाज में सकारात्मक परिवर्तन का आधार बनता है। उन्होंने परम वन्दनीया माताजी के जीवन से प्रेरणा लेते हुए सेवा, संस्कार एवं साधना के माध्यम से युगनिर्माण के कार्यों को आगे बढ़ाने का आह्वान किया।
समारोह के दौरान 108 तीर्थों से संकलित दिव्य तीर्थ-रज एवं परम पूज्य गुरुदेव एवं परम वंदनीया माताजी की चरण पादुका का पूजन सम्पन्न* हुआ, जिससे सम्पूर्ण वातावरण आध्यात्मिक चेतना एवं श्रद्धा से आलोकित हो उठा।
कार्यक्रम में देव संस्कृति विश्वविद्यालय एवं शांतिकुंज के भाई बहनों, अखिल विश्व गायत्री परिवार के कार्यकर्ताओं तथा बड़ी संख्या में श्रद्धालुजनों की भावपूर्ण सहभागिता रही। समस्त आयोजन अनुशासन, सामूहिक साधना एवं आध्यात्मिक गरिमा के साथ संपन्न हुआ।
Recent Post
हमारी वसीयत और विरासत (भाग 157):आत्मीयजनों से अनुरोध एवं उन्हें आश्वासन
कहने को गायत्री परिवार, प्रज्ञा परिवार आदि नाम रखे गए हैं और उनकी सदस्यता का रजिस्टर तथा समयदान-अंशदान का अनुबंध भी है, पर वास्तविकता दूसरी ही है, जिसे हम सब भली भाँति अनुभव भी करते हैं। वह है&mdas...
हमारी वसीयत और विरासत (भाग 156):आत्मीयजनों से अनुरोध एवं उन्हें आश्वासन
साधना से उपलब्ध अतिरिक्त सामर्थ्य को विश्व के मूर्द्धन्य वर्गों को हिलाने-उलटने में लगाने का हमारा मन है। अच्छा होता सुई और धागे को आपस में पिरो देने वाले कोई सूत्र मिल जाते; अन्यथा सर्वथा अपरिचित ...
हमारी वसीयत और विरासत (भाग 155):तीन संकल्पों की महान् पूर्णाहुति
हमने जैसा कि इस पुस्तक में समय-समय पर संकेत किया है। जैसे हमारे बॉस के आदेश मिलते रहे हैं, वैसे ही हमारे संकल्प बनते, पकते व फलित होते गए हैं। सन् 1986 वर्ष का उत्तरार्द्ध हमारे जीवन का महत्त्वपूर्...
हमारी वसीयत और विरासत (भाग 154): जीवन के उत्तरार्द्ध के कुछ महत्त्वपूर्ण निर्धारण
परिवर्तन और निर्माण दोनों ही कष्टसाध्य हैं। भ्रूण जब शिशुरूप में धरती पर आता है, तो प्रसवपीड़ा के साथ होने वाला खून-खच्चर दिल दहला देता है। प्रस्तुत परिस्थितियों के दृश्य और अदृश्य दोनों ही पक्ष ऐसे...
विशिष्ट सामायिक चिंतन: कृत्रिम बुद्धिमत्ता (ए.आई.) एवं शिक्षा
आज जीवन के हर क्षेत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता अर्थात ए०आई० (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) का बोलबाला है। ए०आई० समाचार की सुर्खियों से आगे जीवन के हर पक्ष का हिस्सा बनती जा रही है। स्वास्थ्य, कृषि, बैंकिं...
हमारी वसीयत और विरासत (भाग 153): जीवन के उत्तरार्द्ध के कुछ महत्त्वपूर्ण निर्धारण
कार्यक्रमों में प्रचारात्मक, रचनात्मक और सुधारात्मक अनेक कार्य हैं, जिन्हें घर से बाहर रहते हुए परिस्थितियों के अनुरूप कार्यान्वित किया जा सकता है। प्रचारात्मक स्तर के कार्य— 1. झोला पुस्तकाल...
हमारी वसीयत और विरासत (भाग 152): जीवन के उत्तरार्द्ध के कुछ महत्त्वपूर्ण निर्धारण
माना कि आज स्वार्थपरता, संकीर्णता और क्षुद्रता ने मनुष्य को बुरी तरह घेर रखा है, तो भी इस धरती को वीर विहीन नहीं कहा जा सकता। 60 लाख साधु-बाबा यदि धर्म के नाम पर घर-बार छोड़कर मारे-मारे फिर सकते हैं...
विज्ञान को शैतान बनने से रोकें:अनियंत्रित प्रगति अर्थात महामरण की तैयारी
सामान्य व्यक्ति का मस्तिष्क विकृत हो तो वह थोड़े ही व्यक्तियों का अहित कर सकता है। उसी तरह की दुर्बुद्धि वाले लोगों का एक समूह निकल पड़े, तो हानि की सँभावनाएँ निश्चित बढ़ती हैं। किंतु यदि यही रोग र...
होली
होली विशेषांक— 4
पुराणकालीन, आदर्शसत्याग्रही, भक्त प्रह्लाद के दमन के लिए हिरण्यकश्यप के छल-प्रपंच सफल न हो सके। उसे भस्म करने के प्रयास में होलिका जल मरी और प्रहलाद तपे कंचन बन गए। ख...
अपनों से अपनी बात- होली का संदेश
होली विशेषांक— 3
मातृभूमि की धूलि मस्तक पर लगाकर देशभक्ति की प्रतिज्ञा लेने का महापर्व है— होली। यह असमानता के अभिशाप को जला देने का पर्व भी है। यह पर्व यह संदेश देता है कि आर्थिक...

.jpg)
