शताब्दी समारोह के क्रम में ज्योति कलश यात्रा का शुभारंभ — युगचेतना के संकल्पों का आलोक
अखिल विश्व गायत्री परिवार के शताब्दी समारोह के पावन क्रम में आज ज्योति कलश यात्रा का शुभारंभ अत्यंत श्रद्धा, उल्लास एवं आध्यात्मिक भावनाओं के मध्य सम्पन्न हुआ। यह यात्रा युगऋषि परम् पूज्य गुरुदेव पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य जी की तपःप्रज्वलित चेतना एवं परम वंदनीया माता भगवती देवी शर्मा जी के अवतरण शताब्दी वर्ष के संकल्पों को जन-जन तक पहुँचाने का सशक्त माध्यम बनी।
ज्योति कलश यात्रा का शुभारंभ आदरणीय श्रद्धेया शैल जीजी, शताब्दी समारोह के दलनायक एवं देव संस्कृति विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति आदरणीय डॉ. चिन्मय पंड्या जी
तथा आदरणीय शेफाली जीजी की गरिमामयी उपस्थिति में सम्पन्न हुआ। उपस्थित गायत्री परिजनों ने इस अवसर को युग-निर्माण के नव संकल्प के रूप में अनुभव किया।
इस अवसर पर महामंडलेश्वर एवं प्रमुख, हरिसेवा आश्रम, पूज्य स्वामी हरिचेतनानंद जी की गरिमामयी उपस्थिति विशेष रूप से उल्लेखनीय रही। अपने प्रेरणादायी उद्बोधन में उन्होंने शांतिकुंज की बहुआयामी सेवाओं की सराहना करते हुए कहा कि शिक्षा, स्वास्थ्य, आपदा-प्रबंधन एवं सामाजिक पुनर्निर्माण जैसे प्रत्येक क्षेत्र में अखिल विश्व गायत्री परिवार निस्वार्थ भाव से अग्रणी भूमिका निभा रहा है।
उन्होंने कहा कि शांतिकुंज केवल एक आध्यात्मिक केंद्र नहीं, बल्कि मानवता के सर्वांगीण उत्थान हेतु सतत सक्रिय एक जीवंत चेतना है।
इस अवसर पर वंदनीया माताजी की लगभग 50 पुस्तकों तथा ज्योति कलश यात्रा स्मारिका का विमोचन भी किया गया। ज्योति कलश यात्रा के माध्यम से गुरुदेव के युगदृष्टि से ओत-प्रोत विचारों को समाज की अंतिम पंक्ति तक पहुँचाने का संकल्प पुनः सुदृढ़ हुआ। यह यात्रा शताब्दी समारोह के अंतर्गत आध्यात्मिक जागरण, सांस्कृतिक पुनर्जागरण एवं राष्ट्र-निर्माण की दिशा में एक सशक्त प्रेरणा के रूप में प्रतिष्ठित हुई।
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