सहनशक्ति
आज लोगों में सहनशक्ति बहुत कम होती जा रही है। आप भी ऐसा अनुभव करते होंगे, कि आज से 25/30 वर्ष पहले लोगों में जितनी सहनशक्ति, आपस में प्रेम, सहानुभूति, सेवा, आदर सम्मान की भावना, त्याग तपस्या आदि थी, आज ये सब गुण उतने नहीं रहे। सबसे अधिक तो सहनशक्ति कम हुई है, जिसके बहुत से दुष्परिणाम लोगों को भोगने पड़ रहे हैं। छोटी-छोटी बात पर लोग गुस्सा करते हैं, लड़ाई झगड़ा करते हैं, अभिमान करते हैं, नाराज हो जाते हैं, जिसका परिणाम यह होता है कि आपसी संबंध टूट जाते हैं। यह सब क्यों हो रहा है? संबंधों को ठीक से निभाना नहीं जानते।
और यह नहीं जानते कि कोई भी संबंध अच्छा तभी चल पाएगा, जब संबंध रखने वालों में परस्पर एक दूसरे के प्रति सद्भावना सहानुभूति तथा सहनशक्ति हो।
लोगों को देखिए, उनको समझिए, उनसे मिलिए, उनके गुण कर्म को जानने का प्रयास कीजिए, और सहानुभूति प्रेम सद्भावना पूर्वक उनके साथ संबंध निभाने की सहनशक्ति भी रखिए। तभी आप संबंधों की रक्षा कर पाएंगे और आपके जीवन की भी सुरक्षा हो पाएगी।
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धर्म और दर्शन की उत्क्रांति भी आवश्यक
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विज्ञान और धर्म में समन्वय अनिवार्य
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धर्म की उपेक्षा से पछतावा ही हाथ लगेगा
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धर्म को पूजा-प्रक्रिया तक और विज्ञान को शिल्प व्यवसाय तक सीमित रखा जाए, तो दोनों की गरिमा बढ़ेगी नहीं, गिरेगी ही। दोनों अपंग-अधूरे रह जाएँगे। इन दोनों का परस्पर पूरक होकर रहना उचित ही नहीं, आवश्यक ...
धर्म और विज्ञान के समन्वय में ही कल्याण है
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आत्मा है या नहीं? इसका उत्तर हाँ और ना में दोनों ही तरह दिया जा सकता है। हाँ, उनके लिए ठीक है, जो ज्ञान के आधार पर सूक्ष्म विषयों पर विचार कर सकने और निष्कर्ष निकाल सकने में समर्थ हैं। ना, उनके लिए...
बुद्धि पर धर्म का अंकुश रखा जाए
चेतना के क्षेत्र में मन और बुद्धि का एक क्षेत्र है और श्रद्धा एवं सुसंस्कारिता का दूसरा। मन भौतिक साधनों के सहारे इंद्रियतृप्ति तथा अहंता की पूर्ति चाहता है। अर्थसंचय तथा बड़प्पन प्रदर्शित करने वाल...
विज्ञान और अध्यात्म को साथ-साथ चलना होगा
विज्ञान और अध्यात्म अन्योन्याश्रित हैं। एकदूसरे के पूरक हैं। एक के बिना दूसरे की गति नहीं। विज्ञान हमारे साधनों को बढ़ाता है और अध्यात्म आत्मा को। आत्मा को खोकर साधनों की मात्रा कितनी ही बढ़ी-चढ़ी ...
