शताब्दी वर्ष विशेष : लॉस एंजेलिस में ‘सोना प्रोजेक्ट’ का भूमिपूजन, परम आदरणीय डॉ. चिन्मय पंड्या जी ने प्रदान किया मार्गदर्शन
लॉस एंजेलिस, कैलिफोर्निया (अमेरिका)। जन्म शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में चल रहे उत्तर अमेरिका प्रवास के दौरान परम आदरणीय डॉ. चिन्मय पंड्या जी एवं शांतिकुंज की टोली ने लॉस एंजेलिस में प्रस्तावित ‘सोना प्रोजेक्ट’ के भूमिपूजन समारोह में सहभागिता की। यह अवसर स्थानीय परिजनों के लिए अत्यंत हर्ष, उत्साह एवं प्रेरणा का केंद्र रहा।
भूमिपूजन कार्यक्रम वैदिक मंत्रोच्चार एवं आध्यात्मिक वातावरण के मध्य सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर परम आदरणीय डॉ. पंड्या जी ने प्रकल्प की सफलता एवं उसके माध्यम से समाज में संस्कार, साधना एवं सेवा के विस्तार हेतु शुभकामनाएँ प्रदान कीं।
कार्यक्रम के दौरान स्थानीय परिजनों ने प्रस्तावित केंद्र की रूपरेखा, विकास योजनाओं एवं अब तक की प्रगति से संबंधित विस्तृत प्रस्तुति दी। उन्होंने आने वाले केंद्र की झलकियों एवं प्रगति रिपोर्ट को साझा करते हुए परम आदरणीय डॉ. पंड्या जी से मार्गदर्शन प्राप्त किया। प्रस्तुत योजनाओं का अवलोकन करते हुए उन्होंने केंद्र को आध्यात्मिक चेतना, सांस्कृतिक जागरण एवं समाज निर्माण की गतिविधियों का प्रभावी केंद्र बनाने हेतु महत्वपूर्ण सुझाव प्रदान किए।
अपने उद्बोधन में परम आदरणीय डॉ. पंड्या जी ने कहा कि ऐसे केंद्र केवल भवन नहीं होते, बल्कि वे मानवीय मूल्यों, संस्कारों और युग परिवर्तन के विचारों को जन-जन तक पहुँचाने के सशक्त माध्यम बनते हैं। उन्होंने सभी परिजनों से समर्पण, सहयोग एवं संगठनात्मक भावना के साथ इस प्रकल्प को आगे बढ़ाने का आह्वान किया।
कार्यक्रम में उपस्थित सभी परिजनों ने इस महत्वपूर्ण पहल के प्रति अपना उत्साह व्यक्त करते हुए केंद्र के विकास एवं मिशन की गतिविधियों के विस्तार हेतु सक्रिय योगदान देने का संकल्प लिया। सम्पूर्ण वातावरण श्रद्धा, उत्साह एवं भविष्य के उज्ज्वल संकल्पों से ओतप्रोत रहा।
Recent Post
शांति और सौंदर्य को अपने अंदर खोजो
उनसे प्यार करो, जिन्हें लोग पतित, गर्हित और हेय समझते हैं। जिन्हें केवल निंदा और भर्त्सना ही मिलती है। जो अपने ऊपर लदे हुए पिछड़ेपन के कारण न किसी के मित्र बन पाते हैं और न जिन्हें कोई प्यार करता ह...
समूचा ब्रह्मांड एक चैतन्य शरीर
प्रौढ़ता को प्राप्त करता हुआ विज्ञान अब उन्हीं निष्कर्षों पर पहुँच रहा है, जिन पर सदियों पूर्व भारतीय तत्त्ववेत्ता ज्योतिर्विद् पहुँच चुके थे। समूचा ब्रह्मांड एक चैतन्य शरीर है, जिसका प्रत्येक स्पं...
संवेदना की समस्या को कौन सुलझाएगा?
ज्ञान के दो पक्ष हैं— एक विचारणा, दूसरा संवेदना। विचार मस्तिष्क की देन हैं। वे बाहर से होते हैं; प्रशिक्षण एवं अनुभव के सहारे। भाव भीतर से उठते हैं। वे अंतःकरण के उत्पादन हैं। विचारों से जानक...
विज्ञान और अध्यात्म का समन्वय निश्चित
अध्यात्म और विज्ञान को पिछले दिनों परस्पर विरोधी माना जाता रहा है। नवीनतम शोधें उन्हें पूरक ही नहीं, एकीभूत भी सिद्ध कर रही हैं। चेतना के क्षेत्र में वैज्ञानिक चिंतन का योग अगले दिनों शोध के नए आधा...
असीम पर निर्भर ससीम जीवन
“धरती पर जीवनोपयोगी परिस्थितियों का आधार जिन रासायनिक हलचलों और आणविक गतिविधियों पर निर्भर है, वे अंतरिक्ष से आने वाले रेडियो-तरंगों पर अवलंबित हैं। शक्ति के स्रोत उन्हीं में हैं। विविध विधि ...
धरती माँ को ओढ़ाई हरी चादर | विश्व पर्यावरण दिवस पर वृक्षारोपण अभियान
जमालपुर, 5 जून 2026।
विश्व पर्यावरण दिवस के पावन अवसर पर प्रज्ञा युवा प्रकोष्ठ, जमालपुर द्वारा महिला मंडल के सहयोग से काली पहाड़ी, छठ पूजा घाट (नहर परिसर) में एक विशाल वृक्षारोपण अभिया...
अखिल विश्व गायत्री परिवार के आवाहन पर घर घर किया गया यज्ञ
घर घर में में हम यज्ञ रचाएं, आओ भारत सबल बनाएं इसी कामना से आज बुद्ध पूर्णिमा के पावन पर्व पर अखिल विश्व गायत्री परिवार, शांतिकुंज (हरिद्वार) के दिशा निर्देश पर जनपद बलरामपुर के पचपेड़वा, गैं...
अब दर्शन की बारी है, उसे कुछ करने दिया जाए
विज्ञान का तात्पर्य— “प्रकृति के कुछ रहस्यों का उद्घाटन अथवा कुछ उपकरणों का निर्माण कर लेना मात्र नहीं है, वरन् उसकी व्यापकता मानवी दृष्टिकोण को अधिक सुविस्तृत, तथ्यपूर्ण एवं सत्यनिष्ठ ...
धर्म और दर्शन की उत्क्रांति भी आवश्यक
भावी पीढ़ी को मानसिक दिग्भ्रांति से बचाने के लिए यह प्रश्न सुलझाना आवश्यक है। धर्म के गिरते हुए मूल्य को देखकर ऐसा लगता है कि कहीं आने वाली पीढ़ियाँ पूर्णतया पदार्थवादी होकर अपनी आध्यात्मिक शक्तिया...
धर्म और विज्ञान जुड़वाँ भाई
पिछले दिनों धर्म और विज्ञान को विरोधी माना जाता रहा है। दोनों के तर्क, प्रतिपादन और आधार एकदूसरे से भिन्न समझे जाते रहे हैं। एक को प्रत्यक्षवादी और दूसरे को परोक्षवादी कहकर उन्हें असंबद्ध कहा जाता ...

