शताब्दी वर्ष विशेष : गायत्री चेतना केंद्र, लॉस एंजेलिस में सम्पन्न हुआ भव्य 45 कुण्डीय यज्ञ
लॉस एंजेलिस, कैलिफोर्निया (अमेरिका)। जन्म शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में अमेरिका के गायत्री चेतना केंद्र, लॉस एंजेलिस में एक भव्य 45 कुण्डीय यज्ञ का आयोजन सम्पन्न हुआ। इस दिव्य एवं आध्यात्मिक आयोजन में बड़ी संख्या में परिजनों, श्रद्धालुओं एवं भारतीय समुदाय के सदस्यों ने सहभागिता कर युगऋषि पं. श्रीराम शर्मा आचार्य जी के विचारों एवं यज्ञीय संस्कृति के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की।
इस पावन अवसर पर परम आदरणीय डॉ. चिन्मय पंड्या जी ने यज्ञ में सहभागिता करते हुए उपस्थित जनसमूह को अपने प्रेरणादायी उद्बोधन के माध्यम से मार्गदर्शन प्रदान किया। उन्होंने कहा कि यज्ञ भारतीय संस्कृति की वह महान परंपरा है, जो व्यक्ति, परिवार, समाज और वातावरण के परिष्कार का सशक्त माध्यम है। यज्ञ केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि श्रेष्ठ चिंतन, त्याग, सेवा और लोकमंगल की जीवनशैली का प्रतीक है।
अपने संबोधन में परम आदरणीय डॉ. पंड्या जी ने जन्म शताब्दी वर्ष के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए सभी परिजनों से आत्मपरिष्कार, विचार क्रांति एवं समाज निर्माण के संकल्पों को जीवन में उतारने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि युग परिवर्तन का आधार व्यक्ति निर्माण है और यह कार्य संस्कार, साधना एवं सेवा के माध्यम से ही संभव है।
यज्ञ के दौरान पूरे वातावरण में आध्यात्मिक ऊर्जा, श्रद्धा एवं सकारात्मक चेतना का अद्भुत संचार अनुभव किया गया। उपस्थित परिजनों ने सामूहिक रूप से विश्व शांति, मानव कल्याण एवं सांस्कृतिक जागरण की प्रार्थना की तथा गुरुसत्ता के संदेश को जन-जन तक पहुँचाने का संकल्प लिया।
यह आयोजन न केवल जन्म शताब्दी वर्ष के संदेश को वैश्विक स्तर पर प्रसारित करने का माध्यम बना, बल्कि भारतीय संस्कृति, यज्ञीय परंपरा एवं मानवीय मूल्यों के प्रति लोगों की आस्था और समर्पण का भी प्रेरणादायी उदाहरण सिद्ध हुआ।
Recent Post
शांति और सौंदर्य को अपने अंदर खोजो
उनसे प्यार करो, जिन्हें लोग पतित, गर्हित और हेय समझते हैं। जिन्हें केवल निंदा और भर्त्सना ही मिलती है। जो अपने ऊपर लदे हुए पिछड़ेपन के कारण न किसी के मित्र बन पाते हैं और न जिन्हें कोई प्यार करता ह...
समूचा ब्रह्मांड एक चैतन्य शरीर
प्रौढ़ता को प्राप्त करता हुआ विज्ञान अब उन्हीं निष्कर्षों पर पहुँच रहा है, जिन पर सदियों पूर्व भारतीय तत्त्ववेत्ता ज्योतिर्विद् पहुँच चुके थे। समूचा ब्रह्मांड एक चैतन्य शरीर है, जिसका प्रत्येक स्पं...
संवेदना की समस्या को कौन सुलझाएगा?
ज्ञान के दो पक्ष हैं— एक विचारणा, दूसरा संवेदना। विचार मस्तिष्क की देन हैं। वे बाहर से होते हैं; प्रशिक्षण एवं अनुभव के सहारे। भाव भीतर से उठते हैं। वे अंतःकरण के उत्पादन हैं। विचारों से जानक...
विज्ञान और अध्यात्म का समन्वय निश्चित
अध्यात्म और विज्ञान को पिछले दिनों परस्पर विरोधी माना जाता रहा है। नवीनतम शोधें उन्हें पूरक ही नहीं, एकीभूत भी सिद्ध कर रही हैं। चेतना के क्षेत्र में वैज्ञानिक चिंतन का योग अगले दिनों शोध के नए आधा...
असीम पर निर्भर ससीम जीवन
“धरती पर जीवनोपयोगी परिस्थितियों का आधार जिन रासायनिक हलचलों और आणविक गतिविधियों पर निर्भर है, वे अंतरिक्ष से आने वाले रेडियो-तरंगों पर अवलंबित हैं। शक्ति के स्रोत उन्हीं में हैं। विविध विधि ...
धरती माँ को ओढ़ाई हरी चादर | विश्व पर्यावरण दिवस पर वृक्षारोपण अभियान
जमालपुर, 5 जून 2026।
विश्व पर्यावरण दिवस के पावन अवसर पर प्रज्ञा युवा प्रकोष्ठ, जमालपुर द्वारा महिला मंडल के सहयोग से काली पहाड़ी, छठ पूजा घाट (नहर परिसर) में एक विशाल वृक्षारोपण अभिया...
अखिल विश्व गायत्री परिवार के आवाहन पर घर घर किया गया यज्ञ
घर घर में में हम यज्ञ रचाएं, आओ भारत सबल बनाएं इसी कामना से आज बुद्ध पूर्णिमा के पावन पर्व पर अखिल विश्व गायत्री परिवार, शांतिकुंज (हरिद्वार) के दिशा निर्देश पर जनपद बलरामपुर के पचपेड़वा, गैं...
अब दर्शन की बारी है, उसे कुछ करने दिया जाए
विज्ञान का तात्पर्य— “प्रकृति के कुछ रहस्यों का उद्घाटन अथवा कुछ उपकरणों का निर्माण कर लेना मात्र नहीं है, वरन् उसकी व्यापकता मानवी दृष्टिकोण को अधिक सुविस्तृत, तथ्यपूर्ण एवं सत्यनिष्ठ ...
धर्म और दर्शन की उत्क्रांति भी आवश्यक
भावी पीढ़ी को मानसिक दिग्भ्रांति से बचाने के लिए यह प्रश्न सुलझाना आवश्यक है। धर्म के गिरते हुए मूल्य को देखकर ऐसा लगता है कि कहीं आने वाली पीढ़ियाँ पूर्णतया पदार्थवादी होकर अपनी आध्यात्मिक शक्तिया...
धर्म और विज्ञान जुड़वाँ भाई
पिछले दिनों धर्म और विज्ञान को विरोधी माना जाता रहा है। दोनों के तर्क, प्रतिपादन और आधार एकदूसरे से भिन्न समझे जाते रहे हैं। एक को प्रत्यक्षवादी और दूसरे को परोक्षवादी कहकर उन्हें असंबद्ध कहा जाता ...

