इंस्टीट्यूशनल इनोवेशन काउंसिल (IIC) एवं उद्यम–देव संस्कृति स्टूडेंट्स क्लब द्वारा स्टार्टअप पिच डेक डिजाइन पर विशेष कार्यशाला का आयोजन
माननीय उपाध्यक्ष डॉ. चिन्मय पंड्या जी के दूरदर्शी मार्गदर्शन में देव संस्कृति विश्वविद्यालय के इंस्टीट्यूशनल इनोवेशन काउंसिल (IIC) द्वारा उद्यम (इनोवेशन एवं एंटरप्रेन्योरशिप क्लब), देव संस्कृति स्टूडेंट्स क्लब के सहयोग से 14 अगस्त 2026 को चैतन्य भवन स्थित रामानुजन कंप्यूटर लैब, डीएसवीवी में “स्टार्टअप पिच डेक डिजाइन” विषय पर एक विशेष कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य विद्यार्थियों की उद्यमिता के व्यावहारिक ज्ञान को सुदृढ़ करना तथा निवेशकों एवं अन्य हितधारकों के समक्ष अपने स्टार्टअप विचारों को सुव्यवस्थित, तार्किक एवं प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने की उनकी क्षमता का विकास करना था।
कार्यशाला में प्रतिभागियों को स्टार्टअप पिच डेक की अवधारणा एवं उसकी प्रासंगिकता से परिचित कराया गया। इसके साथ ही पिच डेक के आवश्यक घटकों—समस्या, समाधान, बाजार, बिजनेस मॉडल एवं ट्रैक्शन (प्रगति/उपलब्धि)—पर विस्तार से चर्चा की गई। विद्यार्थियों ने प्रभावी संचार, वैल्यू प्रपोजिशन (मूल्य प्रस्ताव) की स्पष्टता तथा उद्यमशील विचार को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने में सुव्यवस्थित एवं आकर्षक पिच डेक की भूमिका को भी समझा।
कार्यशाला का एक प्रमुख केंद्रबिंदु स्टोरीटेलिंग (कहानी कहने की कला) एवं प्रेजेंटेशन डिजाइन के मूल सिद्धांत रहे। इसके माध्यम से विद्यार्थियों को यह समझने का अवसर मिला कि नवीन विचारों को निवेशकों एवं अन्य हितधारकों के समक्ष प्रभावशाली एवं आकर्षक कथानक के रूप में किस प्रकार प्रस्तुत किया जा सकता है। यह सत्र विशेष रूप से उन विद्यार्थियों के लिए उपयोगी रहा, जो उद्यमी बनने की आकांक्षा रखते हैं अथवा इनोवेशन, स्टार्टअप एवं व्यावसायिक नेतृत्व के क्षेत्र में रुचि रखते हैं। साथ ही, विद्यार्थियों को उद्यम क्लब की उद्यमशील पहलों में सक्रिय रूप से सहभागिता के लिए भी प्रोत्साहित किया गया।
यह पहल विद्यार्थियों के बीच नवाचार, उद्यमिता, अनुभवात्मक अधिगम एवं नेतृत्व विकास को बढ़ावा देने के प्रति विश्वविद्यालय की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। स्टार्टअप पिचिंग, वैल्यू प्रपोजिशन के विकास, स्टोरीटेलिंग एवं प्रभावी प्रस्तुतीकरण का व्यावहारिक अनुभव प्रदान करते हुए विद्यार्थियों को अपने नवीन विचारों को सार्थक उद्यमशील अवसरों में परिवर्तित करने तथा विकसित हो रहे स्टार्टअप एवं इनोवेशन इकोसिस्टम में प्रभावी योगदान देने के लिए आवश्यक कौशल विकसित करने हेतु प्रोत्साहित किया गया।
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