विराट दीपयज्ञ - देव संस्कृति के आलोक से पूरे विश्व को आलोकित करने का संकल्प
'कृण्वन्तो विश्वमार्यम्' अर्थात पूरा विश्व आर्य (श्रेष्ठ) बने, आर्यसमाज के संस्थापक स्वामी दयानंद सरस्वती का यह उद्घोष परम पूज्य गुरुदेव का उद्घोष – ‘इक्कीसवीं सदी उज्ज्वल भविष्य’,’घर घर अलख जगाएंगे हम, बदलेंगे जमाना’ आज साकार होता दिखा। आज मुंबई अश्वमेध महायज्ञ के चौथे दिन के भव्य, विराट, दिव्यता से ओतप्रोत सायं काल होने वाले दीप महायज्ञ में परम पूज्य गुरुदेव की भविष्यवाणी एक धर्म, एक जाति, एक देश, एक भाषा का स्वरूप साकार होता हुआ दिखा। कॉर्पोरेट ग्राउन्ड में मानों सम्पूर्ण ब्रह्मांड के साकार दर्शन हो रहे हों। धर्म, जाति, प्रांत, देश, भाषा, आदि के बंधन से ऊपर उठकर सतयुग के सपने को साकार करने के लिए केवल युग सैनिक ही नहीं, मानों सम्पूर्ण धरा के श्रेष्ठ लोग हाथ में दीप लेकर संकल्पित हो रहा हो।विदेशी मूल के सैंकड़ों श्रद्धालु भक्तों ने दीपयज्ञ में दीपक जलाकर अपने हाथ को ऊपर उठाकर इस बात के लिए संकल्पित हुए की सम्पूर्ण विश्व ही देवसंस्कृति के आलोक से आलोकित हो। दीपयज्ञ के कुछ के कुछ मनोरम, दिव्य, अलौकिक दृश्य।
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विश्व योग दिवस पर शिविर का आयोजन
विश्व योग दिवस पर गायत्री शक्तिपीठ जमालपुर में योग शिविर का आयोजन
जमालपुर, 21 जून। विश्व योग दिवस के अवसर पर गायत्री परिवार ट्रस्ट एवं प्रज्ञा युवा प्रकोष्ठ, जमालपुर के संयुक्त तत्वावधान ...
शांति और सौंदर्य को अपने अंदर खोजो
उनसे प्यार करो, जिन्हें लोग पतित, गर्हित और हेय समझते हैं। जिन्हें केवल निंदा और भर्त्सना ही मिलती है। जो अपने ऊपर लदे हुए पिछड़ेपन के कारण न किसी के मित्र बन पाते हैं और न जिन्हें कोई प्यार करता ह...
समूचा ब्रह्मांड एक चैतन्य शरीर
प्रौढ़ता को प्राप्त करता हुआ विज्ञान अब उन्हीं निष्कर्षों पर पहुँच रहा है, जिन पर सदियों पूर्व भारतीय तत्त्ववेत्ता ज्योतिर्विद् पहुँच चुके थे। समूचा ब्रह्मांड एक चैतन्य शरीर है, जिसका प्रत्येक स्पं...
संवेदना की समस्या को कौन सुलझाएगा?
ज्ञान के दो पक्ष हैं— एक विचारणा, दूसरा संवेदना। विचार मस्तिष्क की देन हैं। वे बाहर से होते हैं; प्रशिक्षण एवं अनुभव के सहारे। भाव भीतर से उठते हैं। वे अंतःकरण के उत्पादन हैं। विचारों से जानक...
विज्ञान और अध्यात्म का समन्वय निश्चित
अध्यात्म और विज्ञान को पिछले दिनों परस्पर विरोधी माना जाता रहा है। नवीनतम शोधें उन्हें पूरक ही नहीं, एकीभूत भी सिद्ध कर रही हैं। चेतना के क्षेत्र में वैज्ञानिक चिंतन का योग अगले दिनों शोध के नए आधा...
असीम पर निर्भर ससीम जीवन
“धरती पर जीवनोपयोगी परिस्थितियों का आधार जिन रासायनिक हलचलों और आणविक गतिविधियों पर निर्भर है, वे अंतरिक्ष से आने वाले रेडियो-तरंगों पर अवलंबित हैं। शक्ति के स्रोत उन्हीं में हैं। विविध विधि ...
धरती माँ को ओढ़ाई हरी चादर | विश्व पर्यावरण दिवस पर वृक्षारोपण अभियान
जमालपुर, 5 जून 2026।
विश्व पर्यावरण दिवस के पावन अवसर पर प्रज्ञा युवा प्रकोष्ठ, जमालपुर द्वारा महिला मंडल के सहयोग से काली पहाड़ी, छठ पूजा घाट (नहर परिसर) में एक विशाल वृक्षारोपण अभिया...
अखिल विश्व गायत्री परिवार के आवाहन पर घर घर किया गया यज्ञ
घर घर में में हम यज्ञ रचाएं, आओ भारत सबल बनाएं इसी कामना से आज बुद्ध पूर्णिमा के पावन पर्व पर अखिल विश्व गायत्री परिवार, शांतिकुंज (हरिद्वार) के दिशा निर्देश पर जनपद बलरामपुर के पचपेड़वा, गैं...
अब दर्शन की बारी है, उसे कुछ करने दिया जाए
विज्ञान का तात्पर्य— “प्रकृति के कुछ रहस्यों का उद्घाटन अथवा कुछ उपकरणों का निर्माण कर लेना मात्र नहीं है, वरन् उसकी व्यापकता मानवी दृष्टिकोण को अधिक सुविस्तृत, तथ्यपूर्ण एवं सत्यनिष्ठ ...
धर्म और दर्शन की उत्क्रांति भी आवश्यक
भावी पीढ़ी को मानसिक दिग्भ्रांति से बचाने के लिए यह प्रश्न सुलझाना आवश्यक है। धर्म के गिरते हुए मूल्य को देखकर ऐसा लगता है कि कहीं आने वाली पीढ़ियाँ पूर्णतया पदार्थवादी होकर अपनी आध्यात्मिक शक्तिया...
