श्रद्धा को जीवन में सम्मिलित करें तथा जीवन को धन्य बनाएं-आदरणीय डॉ चिन्मय पंड्या जी
श्रद्धा के द्वारा हृदय पवित्र होता है, मन में उत्कर्ष की उमंगे उठती हैं तथा जीवन परिवर्तित हो जाता है-आदरणीय डॉ चिन्मय पंड्या जी
।। सेमलिया चाऊ, इंदौर, मध्यप्रदेश ।। अपने मध्य प्रदेश प्रवास में इंदौर के सेमलिया चाउ गांव में आयोजित गायत्री महायज्ञ में देव संस्कृति विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति आदरणीय डॉ चिन्मय पंड्या जी का शुभागमन दिनांक 8 अप्रैल 2024 को हुआ, जहां पर उन्होंने श्रद्धा पर बल देते हुए कहा कि हम अपना मनुष्य जीवन सार्थक करें। श्रद्धा के द्वारा हृदय पवित्र होता है, मन में उत्कर्ष की उमंगे उठती हैं तथा जीवन परिवर्तित हो जाता है। यज्ञ का आयोजन हम इसी उद्देश्य से कर रहे हैं कि हमारी श्रद्धा का विकास हो, गुरुदेव के बताए मार्ग पर हम चल पड़ें तथा जीवन अपने विकसित स्वरूप को प्राप्त कर सके। उन्होंने कहा कि आप श्रद्धा को जीवन में सम्मिलित करें तथा जीवन को धन्य बनाएं।
तत्पश्चात् वे देवास जिले के गायत्री प्रज्ञापीठ सिरोलिया पहुंचे और पूज्य गुरुदेव के अनन्य शिष्य स्वर्गीय श्री नारायण दास जी (105 वर्ष) को भावभीनी श्रद्धांजलि दी, जिन्होंने सन् १९६० से मिशन की गतिविधियों में भाग लेते हुए आस-पास के ४० गांवों तक गुरुदेव का संदेश पहुंचाया । उन्हें लोग प्रेम से ' महाराज' कह संबोधित करते थे तथा जीवनपर्यंत गायत्री परिवार का कार्य किया। मार्ग में देवास, नापाखेड़ी के गायत्री परिजनों के साथ भेंट का क्रम संपन्न हुआ।
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