इन तीन का ध्यान रखिए (अन्तिम भाग)
इन तीनों को स्मरण रखो- आरोग्य, सुमित्र और संतोष वृत्ति। ये तीनों ही आड़े समय काम में आने और रक्षा करने वाले है।
चाहे अन्य बातों में आप पीछे रहें, किन्तु इन स्वास्थ्य और आरोग्य सम्पादकों को प्राप्त करते रहिये। सच्चा मित्र जीवन का सब से बड़ा हितैषी और सहायता है। संतोषवृत्ति मनः शक्ति को परिपुष्ट करने, आन्तरिक समस्वरता को प्रदान करने वाली परमौषधि है।
इन तीनों का प्राप्त करो-(1) अच्छी पुस्तक (2) अच्छी सोबत और (3) अच्छी आदतें। अच्छे, उपयोगी, चरित्र का परिष्कार एवं आत्म सुधार करने वाले सद्ग्रन्थ जिस व्यक्ति के पास है, उसे अकेलापन, नीरसता, शुष्कता कभी न प्रतीत होगी। पुस्तकें सदा सर्वदा चौबीसों घंटे का आत्मसुधार करने को प्रस्तुत हैं, आपकी सद्शिक्षाएँ देने को मौजूद रहती हैं। इनके सत्संग से अनेक साधारण व्यक्ति महत्ता प्राप्त कर सकते हैं। सत्साहित्य से समाज के ज्ञान का संवर्द्धन चरित्र का संशोधन होता है। उच्च कोटि के साहित्य से ही घर की शोभा है।
महात्मा गाँधी जी ने कहा है, “अच्छी पुस्तकों के पास रहने से हमें अपने भले मित्रों के साथ न रहने की कमी नहीं खटकती। जितना ही मैं उत्तम पुस्तकों का अध्ययन करता गया, उतना ही मुझे उनकी विशेषताएं मालूम होती गईं। जिसे पुस्तकें पढ़ने का शौक है, वह सब जगह सुखी रह सकता है।” लोकमान्य तिलक के अनुसार, “मैं नर्क में भी उत्तम पुस्तकों का स्वागत करूंगा, क्योंकि इनमें वह शक्ति है कि वे जहाँ होंगी, वहाँ आप ही स्वर्ग बन जायेगा।” अच्छी पुस्तकें ही अच्छी सोहबत और अच्छी आदतें प्रदान कर सकती हैं।
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अखण्ड ज्योति फरवरी 1950 पृष्ठ 14
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