इन तीन का ध्यान रखिए (भाग 6)
इन तीनों का आनन्द प्राप्त करो- (1) खुला दिल (2) स्वतन्त्रता (3) सौंदर्य- ये तीनों आपके आनन्द की अभिवृद्धि करने वाले तत्व हैं।
खुला दिल सबसे उत्तम वस्तुएँ ग्रहण करने को प्रस्तुत रहता है, संकुचित हृदय वाला व्यक्तिगत वैमनस्य के कारण दूसरे के सद्गुणों को कभी प्राप्त करने की चेष्टा नहीं करता। स्वतन्त्रता का आनन्द वही साधक जानता है जो रूढ़िवादिता, अंधविश्वास, एवं क्षणिक आवेशों से मुक्त है।
स्वतंत्रता का अर्थ अत्यन्त विस्तृत है। सोचने, बोलने, लिखने, प्रकट करने की स्वतन्त्रता प्राप्त करनी चाहिए। जो व्यक्ति आर्थिक दृष्टि से स्वतंत्र है, वह अनेक झगड़ों से मुक्त है। सौंदर्य-आत्मिक और चारित्रिक-दोनों ही उन्नति और प्रगति की ओर ले जाने वाले हैं। यदि सौंदर्य के साथ कुरुचि और वासना मिश्रित हो जायेंगी, तो वह अपना वास्तविक अभिप्राय नष्ट कर देगा।
सौंदर्य के साथ सुरुचि का समावेश होना चाहिए। आप सौंदर्य की जिस रूप में पूजा करें, यह स्मरण रखिये वह आप में शुभ भावनाएं प्रेरित करने वाला, सद्प्रेरणाओं को उत्पन्न करने वाला हो।
इन तीन के लिये लड़ो-इज्जत, देश, और मित्र। इनकी प्रतिष्ठा आपकी अपनी इज्जत है। यदि आप में स्वाभिमान है, तो आपको इन तीनों की रक्षा अपनी सम्पूर्ण शक्ति से करनी चाहिए। इन तीन की चाह करो-निर्मलपन, भलापन, आनन्दी स्वभाव। आन्तरिक शान्ति के लिये तीनों आवश्यक है।
.... क्रमशः जारी
अखण्ड ज्योति फरवरी 1950 पृष्ठ 14
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