कल्प क्या है ?
कल्प क्या है और कल्प के लिये आपको क्या करना पड़ेगा कल्प के लिए दूसरे भी आपकी सहायता करेंगे पर आप ये मानके चलिए कुछ आपको भी करना पड़ेगा। केवल कर्मकाण्ड तक ही सीमित होकर के रह जाएँगे, तो उद्देश्य कैसे पूरा होगा?ये कल्प कोई शारीरिक थोड़ी है। ये क्रियाओं से थोड़ी पूरा हो जाएगा ये आंतरिक कायाकल्प है इसलिए आपको अपनी मनःस्थिति को, अपने चिंतन को और अपनी विचारणाओं को, आस्थाओं को, दृष्टिकोण को भी बदलना पड़ेगा।आमतौर से ये समझते हैं लोग देवताओं की खुशामद करके और देवताओं से कुछ प्राप्त करके हम अपना फायदा उठा लेंगे अध्यात्म इसी का नाम है। ये लोगों का गलत ख्याल है। देवताओं का अनुग्रह मिलता तो है,कुपात्रों को नहीं मिलता पात्रता पहले साबित करनी पड़ती है, इसके बाद में ही कहीं ऐसा होता है कि देवता कोई सहायता कर सकें और किसी भक्त को या साधक को लाभ देने में मददगार बन सकें।
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धर्म और विज्ञान जुड़वाँ भाई
पिछले दिनों धर्म और विज्ञान को विरोधी माना जाता रहा है। दोनों के तर्क, प्रतिपादन और आधार एकदूसरे से भिन्न समझे जाते रहे हैं। एक को प्रत्यक्षवादी और दूसरे को परोक्षवादी कहकर उन्हें असंबद्ध कहा जाता ...
विज्ञान और धर्म में समन्वय अनिवार्य
पदार्थ के रूप में विज्ञान भी आंतरिक सत्ता का ही तो उद्घाटन करता है। धर्म के क्षेत्र में परमात्मा एक विश्वव्यापक शक्ति है और पदार्थ भी शक्ति के ही कण हैं। सच तो यह है कि शक्ति के अतिरिक्त संसार में ...
धर्म की उपेक्षा से पछतावा ही हाथ लगेगा
जीवन उतना जटिल नहीं है, जितना कि बन गया है या बना दिया गया है। हँसी-खुशी की संभावनाओं से वह भरा-पूरा है। शरीर और मन की संरचना इस प्रकार हुई है कि वह बाहर के तनिक से साधनों की सुविधा प्राप्त हो जाने...
धर्म और विज्ञान को मिलकर चलना होगा
धर्म को पूजा-प्रक्रिया तक और विज्ञान को शिल्प व्यवसाय तक सीमित रखा जाए, तो दोनों की गरिमा बढ़ेगी नहीं, गिरेगी ही। दोनों अपंग-अधूरे रह जाएँगे। इन दोनों का परस्पर पूरक होकर रहना उचित ही नहीं, आवश्यक ...
धर्म और विज्ञान के समन्वय में ही कल्याण है
नर और नारी का कार्यक्षेत्र भिन्न है। नारी गृह-व्यवस्था में संलग्न रहती है। गर्भधारण और शिशुपालन यह दोनों काम उसी को करने होते हैं। नर का कार्यक्षेत्र भिन्न है। वह खेत, दफ्तर, कारखाने आदि में ...
ज्ञान ही नहीं, मनुष्य को धर्म भी चाहिए
आत्मा है या नहीं? इसका उत्तर हाँ और ना में दोनों ही तरह दिया जा सकता है। हाँ, उनके लिए ठीक है, जो ज्ञान के आधार पर सूक्ष्म विषयों पर विचार कर सकने और निष्कर्ष निकाल सकने में समर्थ हैं। ना, उनके लिए...
बुद्धि पर धर्म का अंकुश रखा जाए
चेतना के क्षेत्र में मन और बुद्धि का एक क्षेत्र है और श्रद्धा एवं सुसंस्कारिता का दूसरा। मन भौतिक साधनों के सहारे इंद्रियतृप्ति तथा अहंता की पूर्ति चाहता है। अर्थसंचय तथा बड़प्पन प्रदर्शित करने वाल...
विज्ञान और अध्यात्म को साथ-साथ चलना होगा
विज्ञान और अध्यात्म अन्योन्याश्रित हैं। एकदूसरे के पूरक हैं। एक के बिना दूसरे की गति नहीं। विज्ञान हमारे साधनों को बढ़ाता है और अध्यात्म आत्मा को। आत्मा को खोकर साधनों की मात्रा कितनी ही बढ़ी-चढ़ी ...
धर्म व विज्ञान में सामंजस्य अनिवार्य
धर्म और विज्ञान में क्या संबंध है? अथवा क्या विरोध है? इस विषय पर जब भी कुछ सोचते हैं, तो ऐसा लगता है कि शताब्दी के प्रारंभ से ही विज्ञान के परिणाम और धार्मिक विश्वासों में परस्पर स्पष्ट असहमति रही...
गायत्री शक्तिपीठ पचपेड़वा बलरामपुर में नवरात्रि पूर्णाहुति समारोह में जन्म शताब्दी समारोह में भागीदारी का आवाहन
गायत्री शक्तिपीठ पचपेड़वा में नवरात्रि की पूर्णाहुति संपन्न
नौ दिवसीय साधना के पश्चात श्रद्धालुओं ने यज्ञ हवन करके की पूर्णाहुति
जन्म शताब्दी समारोह में भागीदारी का किया गया आवाहन
