भगवान का असली रूप क्या है
असल में भगवान नहीं है, बेटे। असल में भगवान होता तो तरह-तरह के देवी देवता अगर दुनिया में होते तो आपस में मारकाट फैल जाती, लड़ाई-झगड़ा हो जाता, मुकदमेबाजी खड़ी हो जाती और फौजदारी खड़ी हो जाती। ये संतोषी माता हैं, ये काली माता है, काली माता कहती, "अच्छा, हमारा चेला ले गई झपट के।" संतोषी माता कहती, "अच्छा, संतोषी माता के बाल उखाड़ूँगी।" और संतोषी माता कल तक शुक्र के दिन खाता था, वो चढ़ा दूँ, और खटाई-मिठाई नहीं खाता था, अब नवरात्रि में चंडी की पूजा करने लगा। ओ हो, चंडी गाल फुला के बैठ गई, तो हमारा चेला संतोषी माता का चेला चंडी के यहाँ चला गया, और चंडी का चेला संतोषी माता यहाँ। अब मारेगा! आपस में चंडी मरेंगी और वो मरेंगे, औरतों में लड़ाई होगी, और चेलों में लड़ाई होगी, और सबके कचूमर निकल पड़ेंगे। तो महाराज जी, ये क्या चक्कर है? कुछ भी चक्कर नहीं है, सबके कचूमर निकल पड़ेंगे। तो महाराज जी, ये क्या चक्कर है? कुछ भी चक्कर नहीं है, कल्पना है। कल्पना है, कल्पना! अगर न होती, तो इतने तरह के कैसे हो जाते? मैं ये पूछता हूँ तुझे, भगवान दुनिया में एक है या हजारों हैं? हजारों भगवान होंगे तो मुसीबत आ जाएगी। एक भगवान है दुनिया में, ये तरह-तरह की शक्ल है। मुसलमानों ने दाढ़ी वाला बना लिया है, हमने अपना मोर मुकुट वाला बना लिया है, अमुक ने अमुक तरह की बना लिया है, ये सब कल्पना है, कल्पना है। तो असली भगवान क्या है, बेटे? श्रेष्ठ विचारणा, श्रेष्ठ भगवान किसी के पास। जब कभी आता है भगवान, तो श्रेष्ठ विचारों के रूप में आता है, आदर्शों के रूप में, उत्कृष्ठता के रूप में आता है, उत्कृष्ठ चिंतन के रूप में आता है, शक्ल के रूप में नहीं आता। हमने रात को हनुमान देखा, देखा तो अच्छी बात है, बेटे। भगवान, भगवान रोजाना तुझे दिखाई पड़े, महाराज जी, हमको तो कल लक्ष्मी जी दिखाई पड़ी। तो भगवान करे, रोजाना तुझे लक्ष्मी जी दिखाई पड़े। लक्ष्मी जी तुझे दिखाई पड़ी थी, तो कुछ रुपया-पैसा दे गई कि नहीं दे गई? नहीं, महाराज जी, लक्ष्मी जी दिखाई पड़ी, कुछ पूरा तो नहीं कर गई, बेकार कर दिया तूने। अगर तुझे दिखाई देने लगी लक्ष्मी जी, किराया-भाड़ा खर्च कर तेरे घर आई होती, तो खाली हाथ क्यों चली गई, कुछ दे के जाती? नहीं साहब, दिया तो नहीं कुछ। ऐसे शक्ल दिखा कर भाग गई! नहीं, बेटे, तेरा मैं विश्वास नहीं करता। श्रेष्ठता के प्रति, आदर्शों के प्रति, उनको मैं भगवान मानता हूँ। उस भगवान का, श्रेष्ठता का, आदर्शों का, जिन्होंने पालन किया, जिन्होंने पालन किया, वे भगवान के भक्त कहलाए और भगवान के अनुग्रह के अधिकारी बन गए। श्रेष्ठता, देवपूजन के समय जो हमारे विचार हैं, वो होने चाहिए। हम अपना श्रम, श्रम पसीना अच्छे उद्देश्यों के लिए, श्रेष्ठ कामों के लिए निरंतर खर्च किया करेंगे।
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