“यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत…” — श्रीमद्भगवद्गीता का यह दिव्य संदेश केवल युद्धभूमि का उपदेश नहीं, जीवनभूमि का पथप्रदर्शन है।
गीता जयंती आत्मज्ञाना, कर्तव्यपरायणता और धर्म के संरक्षण का पावन स्मरण-दिवस है।
श्रीमद्भगवद्गीता हमें सिखाती है कि—
धर्म वह है जो मानवता को उठाए,
कर्तव्य वह है जो समाज में प्रकाश फैलाए,
और आत्मजागरण वह है जो जीवन को दिव्य उद्देश्य से जोड़ दे।
आइए, इस पावन अवसर पर हम सभी गीता के अमृत-संदेश को अपने विचारों, व्यवहार और कर्म में उतारने का संकल्प लें।
आप सभी को गीता जयंती की हार्दिक शुभकामनाएँ।
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