गीता जयंती पर श्रद्धेया शैल जीजी का अवतरण दिवस श्रद्धा व उल्लास के साथ मनाया गया
हरिद्वार। मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष की एकादशी, जिसे गीता जयंती के रूप में मनाया जाता है, इसी पावन अवसर पर युग तीर्थ शांतिकुंज में श्रद्धेया शैल जीजी का अवतरण दिवस श्रद्धा, सादगी और उत्साह के साथ मनाया गया।
शांतिकुंज, देव संस्कृति विश्वविद्यालय और ब्रह्मवर्चस शोध संस्थान सहित देश-विदेश से आए कार्यकर्ताओं, विद्यार्थियों और परिजनों ने श्रद्धेया जीजी के प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त की और आशीर्वाद प्राप्त किया।
कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने कहा कि श्रद्धेया शैल जीजी ने पूज्य गुरुदेव पं. श्रीराम शर्मा आचार्य और परम वंदनीया माता भगवती देवी शर्मा द्वारा स्थापित युग-निर्माण मिशन को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। संगठन को एक सूत्र में पिरोकर रखने, स्नेहपूर्ण व्यवहार और मातृवत मार्गदर्शन के लिए जीजी को पूरे गायत्री परिवार में विशेष सम्मान प्राप्त है।
डॉ. प्रणव पंड्या जी के साथ जीजी ने संगठनात्मक विस्तार, संस्कार निर्माण और युग-परिवर्तन विषयक योजनाओं को गतिमान रखने में अग्रणी योगदान दिया। वहीं, अपने पुत्र डॉ. चिन्मय पंड्या जी को भी उन्होंने समाज-सेवा और युग-निर्माण के कार्य में निरंतर जुटे रहने हेतु संकल्पित किया है।
कार्यक्रम में आए परिजनों ने कहा कि श्रद्धेया जीजी द्वारा दिया जाने वाला ‘स्नेह लड्डू’ मात्र प्रसाद नहीं बल्कि आशीर्वाद और प्रेरणा का प्रतीक है, जो सभी आयु वर्ग के लोगों को आशा, ऊर्जा और सकारात्मकता से भर देता है।
अंत में सभी परिजनों ने श्रद्धेया जीजी के उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु और सतत् ऊर्जा की कामना की, ताकि उनका मार्गदर्शन आगामी समय में भी समाज को दिशाबद्ध करता रहे।
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