मनुष्य जीवन का सर्वोच्च मूल्य ।
मनुष्य के जीवन से बढ़कर और क्या हो सकता है! आप दूसरे प्राणियों पर नज़र डालिए न। सब बेचारे किस तरीके से — कोई नंगा फिर रहा है, किसी को खाने का ठिकाना नहीं है, कोई कहीं, कोई कहीं। न बोल सकता है, न लिख सकता है।
आपको सारी सुविधाओं से भरा हुआ जीवन सिर्फ इसलिए दिया गया है कि आप इसका अच्छा उपयोग कर करके दिखाएँ। क्या अच्छा उपयोग बन सकता है? दो ही अच्छे उपयोग हैं —
एक तो आप स्वयं में अपने आप को ऐसा बनाएँ जिसको आदर्श कहा जा सकता है। दूसरों के सामने आपका उदाहरण इस तरीके से पेश होना चाहिए, जिसको देखकर दूसरे आदमियों को प्रकाश मिले, रोशनी मिले, आपके पीछे चलने का मौका मिले, और आपकी अंतरात्मा कषाय-कल्मषों से परिशोधित होती हुई और साफ-सुथरी बनती चली जाए। यह आपका स्वार्थ है।
परमार्थ यह है — भगवान की विश्व वाटिका, जिसमें आपको काम करने के लिए भेजा गया है, उसमें एक अच्छे माली की तरह काम करें। भगवान को सहायकों की जरूरत है, साथियों की जरूरत है, इंजीनियरों की जरूरत है, ताकि उसके इतने बड़े बगीचे, इतने बड़े कारखाने को सुव्यवस्थित करने में हाथ बटा सकें।
आपको हाथ बँटाने के लिए पैदा किया गया है — खुशामदें करने के लिए नहीं, नाक रगड़ने के लिए नहीं, चापलूसी करने के लिए नहीं, चमचागिरी करने के लिए नहीं, मिठाई–उपहार भेंट करने के लिए नहीं।
आपको सिर्फ इसलिए पैदा किया गया है कि आप बेहतरीन जिंदगी जिएँ।
इसके लिए क्या करना चाहिए? आमतौर से आदमी भूल जाते हैं। काम की बातें सब भूल जाते हैं, और बेकार की बातें, बेवकूफ़ी की बातें सब याद रखते हैं।
आपको सवेरे उठते ही यह ध्यान करना चाहिए — प्रातःकाल चारपाई पर पड़े-पड़े — आज हमारा नया जन्म हुआ। और हमको इतनी बड़ी कीमत मिली, संपत्ति मिली, जिसकी तुलना में और किसी प्राणी को कोई चीज नहीं मिली है।
आप अपने आप को सौभाग्यवान अनुभव कीजिए। भाग्यशाली अनुभव कीजिए। यह अनुभव कीजिए कि हमारे बराबर भाग्यवान कोई नहीं है।
अभावों की बात, कठिनाइयों की बात, चिंता की बात आप सोचते रहते हैं। यह क्यों नहीं सोचते कि इतना बड़ा मनुष्य का जीवन भगवान ने आपको दे दिया और आप इतने बड़े सौभाग्यशाली हैं!
आप सौभाग्य को सराहें। लेकिन साथ-साथ सराहना के साथ एक और बात भी ध्यान रखें — ऐसी स्कीम बनाएं, योजना बनाएं, जिससे कि इस जीवन का अच्छे से अच्छा उपयोग करना संभव हो सके।
परम पूज्य गुरुदेव पं श्रीराम शर्मा आचार्य
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