वसंत पंचमी: विद्या, विवेक और सृजनात्मक चेतना के जागरण का पर्व — पं. श्रीराम शर्मा आचार्य
माघ मास की शुक्ल पक्ष की पंचमी को मनाया जाने वाला यह पर्वमाँ सरस्वती की उपासना और विद्या, ज्ञान एवं कला के महत्व का स्मरण कराता है।
पूज्य गुरुदेव पं. श्रीराम शर्माआचार्य जी के अनुसार, वसंत पंचमी केवल ऋतु परिवर्तन का संकेत नहीं, बल्कियह हमें अपने जीवन में अध्ययन, आत्मसाक्षात्कार और सृजनात्मक चेतना के महत्व का बोध कराता है।
इस दिन लोग विद्या, संगीत, कला और संस्कार के प्रतीक माँ सरस्वती की पूजा करते हैं, पीला वस्त्र पहनते हैं और ज्ञान तथा समृद्धिकी कामना करते हैं।
इस वसंत पंचमी पर हम अपने जीवन में विद्या, विवेक और सृजनात्मक ऊर्जाका संचार करने का संकल्प लें और समाज में ज्ञान, कल्याण और सौहार्द का प्रसार करेंगे इस भाव के साथ आप सभी को वसंत पंचमी की मंगलमय शुभकामनाएँ।
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