शून्य से नीचे तापमान में सम्पन्न दीप महायज्ञ: यूरोप की ठंड में भी प्रज्वलित हुई आध्यात्मिक ज्योति
उत्तरी यूरोप की कठोर शीत ऋतु के मध्य, जब रीगा का तापमान –19°C तक गिर गया, अपने अंतरराष्ट्रीय प्रवास के दौरान आदरणीय डॉ. चिन्मय पंड्या जी, युवा आइकन, अखिल विश्व गायत्री परिवार प्रतिनिधि एवं देव संस्कृति विश्वविद्यालय के प्रति-कुलपति, के मार्गदर्शन में दीप महायज्ञ एवं यज्ञाधारित आध्यात्मिक अनुष्ठान का भावपूर्ण आयोजन सम्पन्न हुआ।
यज्ञ के समय –17°C के भीषण शीतल वातावरण में भी साधकों एवं श्रद्धालुओं की आस्था और समर्पण अडिग रहा। यह दीप यज्ञ आंतरिक ऊष्मा, श्रद्धा और सामूहिक संकल्प का सशक्त प्रतीक बनकर उभरा—जहाँ बाह्य शीत के मध्य भी चेतना की ज्योति अखंड रूप से प्रज्वलित रही।
डॉ. पंड्या जी ने इस अवसर पर स्पष्ट किया कि सनातन साधना पद्धतियाँ सार्वकालिक एवं सार्वभौमिक हैं, जो किसी भी भौगोलिक सीमा या परिस्थितियों से परे जाकर चेतना का जागरण करती हैं। यह यज्ञ अनुशासन, साधना और आत्म-जागरण की जीवंत अभिव्यक्ति बन गया।
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