यूनिवर्सिटी ऑफ डेब्रसेन में अकादमिक एवं सांस्कृतिक सहयोग को नई दिशा
अपने अंतरराष्ट्रीय प्रवास के अंतर्गत आदरणीय डॉ. चिन्मय पंड्या जी, प्रख्यात शिक्षाविद् एवं दूरदर्शी नेतृत्वकर्ता, ने यूनिवर्सिटी ऑफ डेब्रसेन का आधिकारिक भ्रमण किया, जो शोध, नवाचार और अकादमिक उत्कृष्टता के लिए यूरोप के अग्रणी संस्थानों में प्रतिष्ठित है।
इस अवसर पर डॉ. पंड्या जी द्वारा आयुर्वेद चेयर के स्मारक पट्ट का अनावरण किया गया, जो भारतीय पारंपरिक ज्ञान परंपराओं को वैश्विक शैक्षणिक मंच से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह गरिमामयी समारोह हंगरी में भारत के राजदूत आदरणीय डॉ. अंशुमान गौर जी एवं यूनिवर्सिटी ऑफ डेब्रसेन के रेक्टर प्रो. डॉ. ज़ोल्टान सिल्वैसी की विशेष उपस्थिति में सम्पन्न हुआ।
इस अवसर पर परम पूज्य गुरुदेव का साहित्य विश्वविद्यालय के ‘इंडियन कॉर्नर’ में विधिवत रूप से स्थापित किया गया, जो भारतीय दर्शन, संस्कृति एवं ज्ञान परंपरा के लिए समर्पित एक विशेष स्थान के रूप में विकसित किया जा रहा है। यह आयोजन सभी डीन एवं विभागाध्यक्षों की उपस्थिति में सम्पन्न हुआ।
Recent Post
कृपा-कथा : एक शिष्य की कलम से परम वंदनीया माता जी जगन्माता माँ जगदंबा हैं
परम वंदनीया माता जी मेरे लिए केवल एक श्रद्धेय व्यक्तित्व नहीं, बल्कि साक्षात् जगन्नमाता—मां जगदंबा की अवतारी चेतना हैं। यह मेरा अटूट, अडिग और जीवनानुभव से उपजा विश्...
कृपा-कथा : एक शिष्य की कलम से | गुरु ने उँगली पकड़ ली, फिर लोक-परलोक वही देखते है
गुरुदेव ने कहा - तुम्हारी कई पीढ़ियाँ मेरा कार्य करेगी। से आगे .....
किसी संत ने कहा है— जिसकी उँगली गुरु ने पकड़ ली, उसके लिए लोक और परलोक दोनों सुरक्षित हो जाते ह...
कृपया कथा : एक शिष्य की कलम से गुरुदेव ने कहा - तुम्हारी कई पीढ़ियाँ मेरा कार्य करेगी।
मेरे नाना जी स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय भूमिका निभाते थे, जिसके कारण उन्हें गिरफ्तार कर आसनसोल जेल में बंदी बना दिया गया।
जेल के बैरक में प्रवेश करते ही एक दुबला-पतला किंतु ऊँची क...
शताब्दी नगर से पाषाणों का मौन संदेश
अवतारी सत्ता जब धरती पर अवतरित होती है, तब सृष्टि के जड़–चेतन सभी उसके सहयोगी और अनुयायी बनकर अपने सौभाग्य को उससे जोड़ लेते हैं। ऐसा ही एक अद्भुत दृश्य इन दिनों हरिद्वार के वैरागी द्वीप पर, ...
कृपा कथा : एक शिष्य की कलम से । भक्ति की निर्झरिणी फूटती थी वंदनीया माता जी के गीतों से
"मेरे तो गिरधर गोपाल, दूसरो न कोई.." — मीराबाई की ये अमर पंक्तियाँ अनन्य कृष्ण-भक्ति, विरह और आत्मविसर्जन का साक्षात प्रतीक हैं। कहा जाता है कि मीरा जब गा...
कृपा कथा : एक शिष्य की कलम से चिकित्सा विज्ञान नतमस्तक हुआ माता जी की कृपया के आगे
वर्ष 1994 के आरंभ का समय था। शांतिकुंज के कैंटीन के समीप स्थित खुले मैदान में समयदानी भाई पूरे उत्साह से कबड्डी खेल रहे थे। वातावरण में युवापन, ऊर्जा और आत्मीयता घुली हुई थी। उन्हें खेलते देख मेरा ...
दिव्य अखंड दीप शताब्दी समारोह: शताब्दी नगर का पथ: साधना और संकल्प का प्रतीक
दिव्य अखंड दीप शताब्दी समारोह की मौन तैयारी
परम वंदनीया माता जी एवं दिव्य अखंड दीप शताब्दी समारोह में पधारने वाली विभूतियों के स्वागत हेतु जिस पथ का निर्माण हो रहा है, वह केवल पत्थर और रेत ...
कृपा कथा: एक शिष्य की कलम से वंदनीया माता जी की कृपा का चमत्कार
परम वंदनीया माता जी की दिव्य वाणी से उद्घोषित देवसंस्कृति दिग्विजय अभियान के अंतर्गत चलाए जा रहे अश्वमेध महायज्ञों की शृंखला गुजरात के वरोडा तक पहुँच गई। मैं और मेरे जैसे हजारों कार्यकर्ता इस...
जब नेतृत्व स्नेह बनकर सामने आता है शताब्दी नगर में पीढ़ियों का आत्मीय संगम
जब नेतृत्वकर्ता अपने सहयोगियों और साधकों के सुख–दुःख, सुविधा–अभाव तथा गर्मी–सर्दी की चिंता करते हुए अचानक उनके बीच उपस्थित हो जाएँ, तो थकान स्वतः ही विलीन हो जाती है और चेहरे पर स...
पूज्य गुरुदेव की लेखनी साहित्य ही नहीं भाग्य भी रचती है
कुछ व्यक्तित्व केवल इतिहास नहीं रचते, वे जीवन गढ़ते हैं। पूज्य गुरुदेव पं. श्रीराम शर्मा आचार्य जी ऐसे ही दिव्य अवतारी पुरुष थे, जिनकी लेखनी, दृष्टि और आशीर्वाद से असंख्य जीवनों की धारा बदल गई। यह ...
