भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा के प्रावीण्य छात्र पुरस्कार वितरण समारोह का आयोजन
भारतीय संस्कृति में समाहित ज्ञान से सम्पूर्ण विश्व आलोकित होता रहा है। पराधीनता और पतन के प्रभाव के काल में भारतीय छात्रों को इसी महान ज्ञान परंपरा से दूर कर दिया गया, जिसके परिणामस्वरूप ज्ञान के उच्च शिखर पर प्रतिष्ठित हमारी संस्कृति से अपने ही देश के लोग विमुख होने लगे। परम पूज्य गुरुदेव एवं परम वंदनीया माताजी की आदि-पुरातन भारतीय संस्कृति के पुनर्स्थापन की संकल्पना को साकार करने के उद्देश्य से अखिल विश्व गायत्री परिवार द्वारा ‘भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा’ के माध्यम से देशभर के विद्यालयों में भावी पीढ़ी को प्राचीन ज्ञान परंपरा का बोध एवं प्रशिक्षण कराया जा रहा है। इसी क्रम में गायत्री तीर्थ शांतिकुंज में दिनांक 12 फरवरी 2026 को प्रावीण्य छात्र पुरस्कार वितरण समारोह का आयोजन किया गया। इस अवसर पर हरिद्वार जिले की रुड़की, भगवानपुर, हरिद्वार एवं लक्सर—चारों तहसीलों के उन विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया, जिन्होंने भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा में अपनी-अपनी तहसील एवं जिले में प्रथम, द्वितीय तथा तृतीय स्थान प्राप्त किया। समारोह के अवसर पर शांतिकुंज व्यवस्थापक आदरणीय श्री योगेंद्र गिरी जी ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा के माध्यम से जीवन में होने वाले सकारात्मक परिवर्तनों को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि यह परीक्षा केवल बौद्धिक विकास ही नहीं, बल्कि नैतिक एवं सांस्कृतिक जागरण का भी माध्यम है। इस समारोह में भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा विभाग के कार्यकर्ताओं के साथ-साथ हरिद्वार के विभिन्न विद्यालयों से आए छात्र-छात्राएँ एवं शिक्षकगण उपस्थित रहे।
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