परिवीक्षा समीक्षा सत्र में विद्यार्थियों से हुआ आत्मीय संवाद
देव संस्कृति विश्वविद्यालय के दिव्य परिसर में परिवीक्षा समीक्षा सत्र का आयोजन किया गया। परिवीक्षा पूर्ण कर लौटे छात्र–छात्राओं से विश्वविद्यालय के प्रति कुलपति आदरणीय डॉ. चिन्मय पंड्या की आत्मीय भेंट एवं संवाद संपन्न हुआ।
इस अवसर पर आदरणीय डॉ. चिन्मय पंड्या जी ने विद्यार्थियों के परिवीक्षा काल के अनुभवों को अत्यंत संवेदनशीलता एवं ध्यानपूर्वक सुना। उन्होंने परिवीक्षा को केवल एक प्रशिक्षण नहीं, बल्कि व्यक्तित्व निर्माण, आत्मअनुशासन एवं जीवन मूल्यों के विकास की सशक्त साधना बताया।
उन्होंने कहा कि परिवीक्षा के दौरान प्राप्त संस्कार ही विद्यार्थी के जीवन की दिशा और दशा को निर्धारित करते हैं।
संवाद के दौरान विद्यार्थियों में उत्साह, आत्मविश्वास एवं नवचेतना का भाव स्पष्ट रूप से परिलक्षित हुआ। यह समीक्षा सत्र विद्यार्थियों के लिए प्रेरणास्रोत सिद्ध हुआ और उनके शैक्षणिक तथा जीवन-पथ को और अधिक सुदृढ़ करने वाला रहा।
यह आयोजन देव संस्कृति विश्वविद्यालय की संस्कार-आधारित शिक्षा प्रणाली का जीवंत उदाहरण बना।
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