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हमारी वसीयत और विरासत (भाग 146): जीवन के उत्तरार्द्ध के कुछ महत्त्वपूर्ण निर्धारण

Feb. 27, 2026, 5 p.m.

एक-एक लाख की पाँच शृंखलाएँ सँजोने का संकेत हुआ। उसका तात्पर्य है— कली से कमल बनने की तरह खिल पड़ना। अब हमें इस जन्म की पूर्णाहुति में पाँच हव्य सम्मिलित करने पड़ेंगे। वे इस प्रकार हैं—
1. एक लाख कुंडों का गायत्री यज्ञ।
2. एक लाख युगसृजेताओं को उभारना तथा शक्तिशाली प्रशिक्षण करना।
3. एक लाख अशोक वृक्षों का आरोपण।
4. एक लाख ग्रामतीर्थों की स्थापना।
5. एक लाख वर्ष का समयदान-संचय।
यों पाँचों कार्य एक-से-एक कठिन प्रतीत होते हैं और सामान्य मनुष्य की शक्ति से बाहर, किंतु वस्तुतः ऐसा है नहीं। वे संभव भी हैं और सरल भी। आश्चर्य इतना भर है कि देखने वाले उसे अद्भुत और अनुपम कहने लगे।
1. एक लाख गायत्री यज्ञ— वरिष्ठ प्रज्ञापुत्रों में से प्रत्येक को अपना जन्मदिवसोत्सव अपने आँगन में मनाना होगा। उसमें एक छोटी चौकोर वेदी बनाकर गायत्री मंत्र की 108 आहुतियाँ तो देनी ही होंगी। इसके साथ ही समयदान-अंशदान की प्रतिज्ञा को निबाहते रहने की शपथ भी लेनी होगी। अभ्यास में समाए हुए दुर्गुणों में से कम-से-कम एक को छोड़ना और सत्प्रवृत्ति-संवर्द्धन के लिए न्यूनतम एक कदम उठाना होगा। इस प्रकार अंशदान से झोला पुस्तकालय चलने लगेगा और शिक्षितों को युगसाहित्य पढ़ने तथा अशिक्षितों को सुनाने की विधि-व्यवस्था चल पड़ेगी। अपनी कमाई का एक अंश परमार्थ प्रयोजनों में लगाते रहने से वे सभी कार्य प्रायः चल पड़ेंगे, जिनके लिये प्रज्ञा मिशन द्वारा सभी प्रज्ञा-संस्थानों को प्रोत्साहित किया जा रहा है।
हर गायत्री यज्ञ के साथ ज्ञानयज्ञ जुड़ा हुआ है। कुटुंबी, संबंधी, मित्र, पड़ोसी आदि को अधिक संख्या में इस अवसर पर बुलाना चाहिए और ज्ञानयज्ञ के रूप में सुगम संगीत के अनुरूप प्रवचन करने की व्यवस्था बनानी चाहिए। यज्ञवेदी का मंडप सूझ-बूझ और उपलब्ध सामग्री से सजाया जा सकता है। वेदी को लीपा-पोता जाए और चौक-पूरकर सजाया जाए, तो वह देखने में सहज आकर्षक बन जाती है। मंत्रोच्चार सभी मिल-जुलकर करें। हवन सामग्री के रूप में यदि सुगंधित द्रव्य न मिल सके तो गुड़ और घी से छोटे बेर जैसी गोली बनाई जा सकती है। 108 गोलियों में 108 आहुतियाँ हो जाती हैं। इससे सब घर का वातावरण एवं वायुमंडल शुद्ध होता है। एक स्थान पर 1 लाख कुंड का यज्ञ करने से उसका प्रभाव सीमित क्षेत्र में रहेगा, किंतु यदि एक लाख घरों में 1 लाख X 108 लगभग एक करोड़ आहुतियों का यज्ञ हो जाएगा। यह न्यूनतम है। इससे अधिक हो सके, तो संख्या 240 तक बढ़ाई जा सकती है। आतिथ्य में कुछ खरच करने की मनाही है। इसलिए हर गरीब-अमीर के लिए यह सुलभ है। महत्त्व को देखते हुए वह छोटी-सी प्रक्रिया महत्त्वपूर्ण सत्परिणाम उत्पन्न करने में समर्थ हो सकती है।

क्रमशः जारी
पं श्रीराम शर्मा आचार्य

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