सपने में भगवान के दर्शन
भगवान की यह परख बताता हूं, नहीं साहब, रात को सपने में दिखता है। चल, सपने में दिखता है। इसको नहीं, महाराज जी, रात को हमको हनुमान सपने में दिखते हैं। हां, तुझे दिखते हैं सपने में हनुमान? यह तो ख्वाब दिखता है। नहीं, हमको दिन में भी दिखे थे दो बार। हां, दिन में भी सपने दिखाई पड़ते हैं। तो आप हमको तो साक्षात्कार करा दीजिए भगवान का।साक्षात्कार करा दूंगा, तो तू मर जाएगा। तेरा फटकेगा पेट। महाराज जी, भगवान को साक्षात्कार? हां, साक्षात्कार कराएंगे, तेरी खोपड़ी फट जाएगी, और तेरा कलेजा फट जाएगा। हनुमान का साक्षात्कार हनुमान ने किया था। हनुमान ने किया था और साक्षात्कार करने के पश्चात फिर जीवन की सारी दिशाएं बदल गई थीं। तू क्या चाहता है? तू तो तमाशा देखना चाहता है न? हां, महाराज जी, भगवान ऐसे आवे, मोर मुकुट वाले भगवान आवे, और देवी नहार में बैठी हुई आवे। चले, ऐसा भगवान तो तुझे मैं ही दिखा दूंगा। ऐसा भगवान की तू पूजा काहे करता है? मैं तो ऐसे ही तमाशा दिखा दूंगा तुझे। ले, देख, कल्याण अखबार में छप रहा है, देख ले।नहीं, महाराज जी, मैं तो असली महादेव देखूंगा। तो जा, शिव पार्वती विवाह चल रहा है, नावेल्टी टाकीज में। वहां देख आ। नहीं, महाराज जी, मैं तो दर्शन करना चाहता हूं। तेरा मैं करा दूंगा दर्शन।आप कैसे करा देंगे? तू मेरे पास आ जाना, मैं करा दूंगा। किसका करा देंगे? तू जिसका कहेगा, उसी का करा दूंगा। महादेव के करा देंगे? हां, बेटे, महादेव का ही करा दूंगा।नहीं, मैं तो देवी का करूंगा। देवी का करा दूंगा। संतोषी माता का, मैं संतोषी माता का करा दूंगा। आप कैसे करा देंगे? बेटे, मैं तेरे ऊपर कहेगा, सोई दिखा दूंगा। जो भी तू कहे, भूत दिखा दूं, पलीत दिखा दूं, कुछ भी दिखा दूं। ऊपर एडवोकेट को जानता हूं, एडवोकेट को कह दूंगा, तो तुझे खट से दिखाई पड़ेगा। जो भी कहेगा, सोई दिखा दूंगा। जो भी तू कहेगा, सोई दिखा दूंगा।तो महाराज जी, फिर उसको देखने के बाद में मुझे देवी की कृपा मिल जाएगी? नहीं, बेटे, कृपा नहीं मिलेगी। यह तो ख्वाब है, ख्वाब देख लिया, रात में देख लिया तो क्या? और दिन में देख लिया तो क्या? भगवान के दर्शन करा दीजिए।नहीं, बेटे, भगवान के दर्शन तू आंख से देखना चाहता है, वह गलत है। आंख से किसी ने दुनिया में देखा नहीं है भगवान को। भगवान मिट्टी का नहीं है। भगवान एक संवेदना है, भगवान एक चेतना है, जो मनुष्य की अंतरात्मा में, अंतःकरण में श्रद्धा के रूप में, विश्वास के रूप में आती हैं, उत्साह के रूप में आती हैं। उससे पता चलता है कि आदमी के ऊपर भगवान आया कि नहीं।भगवान आया कि नहीं? भगवान जब मनुष्य के ऊपर आता है, तो कैसे आता है? दो उदाहरण मैंने दे दिए, नशे के रूप में, जिसमें आदमी के विचार करने के तरीके अलग हो जाते हैं दुनिया वालों से अलग, और आदमी के चिंतन के तरीके अलग हो जाते हैं दुनिया वालों से अलग। उनके जीवन के लक्ष्य, उनकी दिशा-धाराएं, उनके क्रियाकलाप, उनके सोचने के ढंग बहुत ऊंचे हो जाते हैं।
पं श्रीराम शर्मा आचार्य
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