गुरू का ध्यान क्यों करना चाहिए?
लोगों को शिकायत रहती है, मन भागता रहता है। मन क्या भागना चाहिए, बेटे? जप के साथ-साथ में दो ध्यान हम बताते रहते हैं, अक्सर एक साकार ध्यान बताते रहते हैं, एक निराकार बताते रहते हैं। साकार ध्यान ये है कि हमारी माँ गायत्री, माँ गायत्री, माँ जिसकी कृपा हमारे ऊपर बरसती है, जिसका अनुग्रह हमारे ऊपर बरसता है। गायत्री माता क्या है? गायत्री माता वह है, जिसमें हम जवान स्त्री को माता के रूप में देखना शुरू करते हैं। वह बुद्धि, पराए पैसे को जिसमें हम आँख के रूप से देखना चाहते हैं, वह बुद्धि, सद्विवेक की देवी, सद्विवेक की देवी, सद्विचारणाओं की देवी का नाम गायत्री मंत्र है। गायत्री देवी है, महाराज जी, हाँ, देवी है तो सही। बेटा, गायत्री देवी, देवी आपको आती है, तो खूब सामान लाती है। हाँ, बेटे, देवी कभी-कभी तो आती थी पहले, पर अब देवी को हमने ये कहा न जाने हैं भी कि नहीं। इसीलिए फिर हमने तब ये गुरू का ध्यान करना शुरू कर दिया है। गुरू का ध्यान, हाँ, बेटे, हम गुरू का ध्यान करते हैं। गुरू को हमने देखा है, देखा है उनके बारे में, हमको विश्वास है। गायत्री माता के बारे में तो हमको ये शक हो गया है कि जो शक्ल हमने बना रखी है, ये हमारी कल्पित है। कल्पित है हमारे मन में, ये शक हो गया है। शक हो जाने की वजह से हमारी निष्ठा डावां-डावांडोल हो गई है, और ये कल्पना है। हाँ, ये कल्पना है, किसकी कल्पना है? सिद्धांतों की कल्पना, आदर्शों की कल्पना, आदर्श है कौन सा? आदर्श जिसमें हम जवान औरत को जिस भावना से, जिस बुद्धि से माँ की तरह से देखते हैं, उस भावना का नाम गायत्री है।
Recent Post
विज्ञान ने समस्याएँ सुलझाई कम, उलझाईं अधिक
विज्ञान की एक शाखा रसायनशास्त्र ने लाखों-करोड़ों कार्बनिक और अकार्बनिक पदार्थों की खोज कर ली। इतनी औषधियाँ बन चुकी हैं कि डॉक्टर उन सबको याद भी नहीं रख सकता। जीव विज्ञान ने यहाँ तक पहल...
विज्ञान और उसकी अस्थिरता
ईसा से 200 वर्ष पूर्व नीसिया के वैज्ञानिक ‘हिप्पार्कस’ ने बताया कि, “ब्रह्मांड का केंद्र पृथ्वी है। अन्य ग्रह-उपग्रह उसके चारों ओर केंद्रीय शक्ति (एक्...
विज्ञान की अपूर्णताएँ
विज्ञान की अधिकांश उपलब्धियाँ जड़ प्रकृति के क्षेत्र में हैं। पृथ्वी में पाए जाने वाले सभी कार्बनिक (आर्गेनिक) और अकार्बनिक (इन आर्गेनिक) धातुओं, खनिजों, गैसों और इन सबके द्वारा बनने वाले यंत्रों, ...
विज्ञान की अपूर्णता और स्थिरता
भौतिक तथ्यों की जानकारी देना और पदार्थ की शक्ति का सुविधाजनक उपयोग सिखाना— विज्ञान का क्षेत्र इतना ही है। हर बात की एक सीमा होती है। विज्ञान की सीमा भी इतनी ही है...
विज्ञान की अपूर्णता और अस्थिरता
भौतिक तथ्यों की जानकारी देना और पदार्थ की शक्ति का सुविधाजनक उपयोग सिखाना— विज्ञान का क्षेत्र इतना ही है। हर बात की एक सीमा होती है। विज्ञान की सीमा भी इतनी ही है। इस परिधि को किसी प्रकार कम ...
नवरात्रि में घर घर चल रहे विभिन्न संस्कार /गायत्री मंदिर पर रामनवमी पर्व पर पर होगा पूर्णाहुति और भंडारे का आयोजन
*नवरात्रि में घर घर चल रहे विभिन्न संस्कार*
*गायत्री मंदिर पर रामनवमी को होगा पूर्णाहुति और भंडारे का आयोजन*
संवाद सूत्र: पचपेड़वा/गैंसड़ी <...
हमारी वसीयत और विरासत (भाग 157):आत्मीयजनों से अनुरोध एवं उन्हें आश्वासन
कहने को गायत्री परिवार, प्रज्ञा परिवार आदि नाम रखे गए हैं और उनकी सदस्यता का रजिस्टर तथा समयदान-अंशदान का अनुबंध भी है, पर वास्तविकता दूसरी ही है, जिसे हम सब भली भाँति अनुभव भी करते हैं। वह है&mdas...
हमारी वसीयत और विरासत (भाग 156):आत्मीयजनों से अनुरोध एवं उन्हें आश्वासन
साधना से उपलब्ध अतिरिक्त सामर्थ्य को विश्व के मूर्द्धन्य वर्गों को हिलाने-उलटने में लगाने का हमारा मन है। अच्छा होता सुई और धागे को आपस में पिरो देने वाले कोई सूत्र मिल जाते; अन्यथा सर्वथा अपरिचित ...
हमारी वसीयत और विरासत (भाग 155):तीन संकल्पों की महान् पूर्णाहुति
हमने जैसा कि इस पुस्तक में समय-समय पर संकेत किया है। जैसे हमारे बॉस के आदेश मिलते रहे हैं, वैसे ही हमारे संकल्प बनते, पकते व फलित होते गए हैं। सन् 1986 वर्ष का उत्तरार्द्ध हमारे जीवन का महत्त्वपूर्...
हमारी वसीयत और विरासत (भाग 154): जीवन के उत्तरार्द्ध के कुछ महत्त्वपूर्ण निर्धारण
परिवर्तन और निर्माण दोनों ही कष्टसाध्य हैं। भ्रूण जब शिशुरूप में धरती पर आता है, तो प्रसवपीड़ा के साथ होने वाला खून-खच्चर दिल दहला देता है। प्रस्तुत परिस्थितियों के दृश्य और अदृश्य दोनों ही पक्ष ऐसे...
