कांटा किसे कहते हैं ?
कांटा उसे कहते हैं, जिसमें की एक गर्मी नाम की चीज रह जाती है। गर्म चीज, एक गर्मी — ऊर्जा। ऊर्जा काम करती है वेब्स। उसी का एक हिस्सा है। एटम उसका मोटा रूप है, आर्टिकल्स उसके मोटे रूप हैं और आगे मोटे रूप हैं। हम वहाँ गए,कांटा के ऊपर।
और कांटा के संबंध में इकोलॉजी। इकोलॉजी साइंस ने हमको यह बता दिया है कि कांटा विचारशील है, जिसके अंदर जीवन है, चेतना है। हम इकोलॉजी के सिद्धांतों को जब हम लोगों को समझाते हैं और हम लोगों को पढ़ाते हैं, तो कहते हैं — हर चीज विचार के साथ जिंदा है।
आदमी और पेड़ आपस में फिर आ गए। आदमी, कार्बन डाइऑक्साइड छोड़ता है और पेड़ हमारे लिए ऑक्सीजन छोड़ता है। हम और पेड़ आपस में रिलेटिव और आपस में संबंधी हैं। इंसान जिएगा तो पेड़ जिएगा, पेड़ जिएगा तो आदमी जिएगा।
यह कौन है साहब? यह बड़े विचारशील की बात है। यह बड़ा विचारशील है। कोई-कोई नेचर बड़ी विचारशील है। क्वांटा बड़ा विचारशील है। और अब हमने यह निश्चय कर लिया है कि, जिसके बारे में लोग कहते थे — जड़ है, जड़ है, सारा दुनिया जड़ है। स्वार्थवादी पदार्थ-विज्ञान कहता था, सारी दुनिया जड़ है। अब हम तुमसे कहते हैं कि कोई जड़ नहीं है। यह चेतन है।
नहीं साहब, आज दुनिया केवल बॉल नहीं है। दुनिया में कोई क्वांटा नहीं और कोई मैटर नहीं। अब हम वेदांत की भाषा में नए सिरे से बोलेंगे। मित्रों, अब हमारे अंदर हिम्मत है और हमारे पास अक्ल है। उन्हीं के हथियारों को, उन्हीं के जूते से, उन्हीं का सिर पीटेंगे। और हर आदमी से कहेंगे — अक्ल के हिसाब से हम चलेंगे। और हम आपको पदार्थ के हिसाब से चलेंगे। और लॉजिक के हिसाब से चलेंगे। और स्पीच आपको देंगे। और आपके सामने तर्क पेश करेंगे।
और यह करेंगे, और यह तर्क करेंगे कि — ब्रह्म अर्थात विचारणा, अर्थात चेतना अपनी आपकी जगह है। और आदमी जड़ नहीं है, और दुनिया जड़ नहीं है, मित्रों।
यह ब्रह्म विद्या का हमको जरूरत इस बात के लिए पड़ी। नए सिरे से ब्रह्मवर्चस, जिसके कि आप मेंबर हैं — ब्रह्मवर्चस जो हमारी भावी वाली क्रिया पद्धति है, शिक्षण वाली पद्धति है — इसका वेश बदल दिया है। इसलिए यह नवीनतम है। और यह क्योंकि इसकी जीवात्मा प्राचीनतम है। जीवात्मा को हमने छुआ नहीं। जीवात्मा को हम रक्षा करेंगे।
पं श्रीराम शर्मा आचार्य
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