योग किसे कहते हें ? Yog Kise Kehte Hai
आध्यात्मिकता के साथ योग और तप। योग और तप की दो धाराएं। योग और तप की दो धाराएं, और दोनों मिली हुई हैं। दोनों में से हम किसी को अलग नहीं कर सकते।
योग किसे कहते हैं? योग, बेटे, ध्यान को कहते हैं।
योग किसे कहते हैं? भावना की दृष्टि से आत्मा और परमात्मा को जो हम मिलाने का संकल्प करते हैं, उस वृत्ति का नाम योग है। हम दोनों को मिलाते हैं — अपनी आत्मा को परमात्मा से मिलाते हैं, शरणागत होते हैं, समर्पण करते हैं, भक्ति भावना से ओतप्रोत हो जाते हैं।
"यह क्या चीज़ कह रहे हैं आप?"
"यह, बेटे, मैं वह कह रहा हूं — योग की बात कह रहा हूं तुझसे, जिसको मैंने अपनी शिक्षण पद्धति में ब्रह्मविद्या के नाम से कहा है।"
योग यह भावनात्मक उछाल है, भावनात्मक उबाल है। भावनाओं को हम परिष्कृत करेंगे, श्रेष्ठ करेंगे, भावनाओं को उज्ज्वल बनाएंगे, भावनाओं को पवित्र बनाएंगे, भावनाओं को कोमल बनाएंगे, भावनाओं को संवेदनशील बनाएंगे — ताकि हमारी भावनाएं वैसी हो जाएं, जिसमें कि हम ब्रह्म से मिल सकने के लायक जीवात्मा को मिला सकें। हम इसलिए इतना कोमल अपने आप को बनाएंगे कि जितना दम, और हम अपने आप को इतना गर्म करेंगे कि जितना ब्रह्म। दोनों को एक ही क्वालिटी का मिलाकर के, हम साथ-साथ मिला देंगे और हम दोनों जुड़ने की कोशिश करेंगे।
पानी, पानी मिल सकता है दूध में।
"नहीं साहब, यह मिला दीजिए।"
"क्या मिला दें?"
"यह पत्थर का चूरा?"
"यह नहीं मिलेगा। यह पत्थर का चूरा नहीं मिल सकता। हाँ, दूध में कुछ मिलाना है तो पानी मिल सकता है। लिक्विड, लिक्विड भी मिल सकता है।"
"नहीं साहब, ऐसे ही कुछ मिला दीजिए। आप तो यह मिट्टी का तेल मिला दीजिए।"
"बेटे, मिट्टी के तेल की परत आ जाएगी ऊपर, पानी नीचे रह जाएगा।"
"नहीं साहब, मिला दीजिए।"
"नहीं मिल सकता। पानी भारी और मिट्टी का तेल हल्का है — दोनों नहीं मिल सकते।"
ब्रह्म और जीव को मिलाने के लिए अपनी संवेदनाओं को, अपनी विचारणाओं को, अपनी मन:स्थिति को हम कोमल बनाते हैं, नम्र बनाते हैं, शीलवान बनाते हैं, चरित्रवान बनाते हैं, दिव्य बनाते हैं — जिसका नाम योग है।
"तो फिर महाराज जी, योग से सिद्धि मिल जाएगी?"
"नहीं, योग से सिद्धि नहीं मिलेगी। योग का एक और भाई है। भाई को लेकर के तू नहीं चलेगा, तो सिद्धि नहीं मिलेगी। मैं बताये देता हूं तुझे।"
"महाराज जी, मैं खूब समाधि लगाया करूंगा, ध्यान लगाया करूंगा।"
"बेटे, तो नहीं मिलेगी। हम कह रहे तुझसे — उसका एक और सहायक है, उसको लेके चल।"
"सहायक कौन सा?"
"उसका नाम है तप।"
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