पीले वस्त्र की मर्यादा |
बेटे, हमने वहां ईसाइयों की नन को देखा।
हमारा कॉलेज में इंदौर में व्याख्यान हुआ। उन्होंने रसोई के ऊपर, पादरियों ने हमारा व्याख्यान कराया।
सबसे आगे बैठी हुई थीं नन।
नन बड़ी-बड़ी सुंदर लड़कियां थीं, सुंदर लड़कियां थीं, पर प्रत्येक लड़की को मैंने ये देखा कि अगले वाली लाइन में बैठी हुई थी, आंखें नीची थीं सबकी।
सबकी आंखें नीची थीं।
मैंने उनसे ये पूछा — "ये क्या बात है? आपके यहां तो घूंघट नहीं होता?"
उन्होंने कहा — "हमारे यहां घूंघट तो नहीं होता, हमारी आंखें नीचे रखी जाती हैं।
आंखें नीचे रखी जाती हैं। और मर्दों के बारे में ये... ये... ये जो नन हैं, घूंघट नहीं डालतीं, लेकिन इस बात का ध्यान रखती हैं — कि कई ऐसी हलचल या बात ना करें, जिसको देखने वाला आदमी गलत अंदाज़ा लगा सके।"
उन्हें दीक्षा दी जाती है, तब ये बताया जाता है कि — आपको आंखें नीची रखनी पड़ेगी।
और अगर मर्दों से बात करनी है, तो आप इस तरीके से मुंह जरा टेढ़ा करके करेंगे।
कोई ज़रूरी बात होगी तो इस ढंग से करेंगे, ताकि कोई आदमी गलत अंदाज़ा ना लगा ले।
बच्चियों, आपसे भी मैं कहता हूं।
और लड़कों, आपसे भी कहता हूं।
क्योंकि आपको सामाजिक क्षेत्र में भेजता हूं, और खासतौर से मैं आपको धार्मिक क्षेत्र में भेजता हूं।
प्रचारक बनाकर के भेजता हूं।
आप इन बातों में बेहद, बेहद, बेहद सावधान रहिए।
आपको स्त्रियों के बारे में किसी ने कलंक लगा दिया — तो बेटे, हमारा मरना हो जाएगा।
और आपके बारे में किसी ने पैसों के बारे में कलंक लगा दिया — तो हमारा मरना हो जाएगा।
फिर हम यह मिशन बंद कर देंगे। फिर हम अपना खोंचा लगा लेंगे, और हम रिक्शा चला लेंगे।
हम यह मिशन बंद करेंगे।
आप हमारी इज्जत खराब करेंगे — इज्जत मत खराब कीजिए।
हमने ऋषि का बाना पहना है, साधु का बाना पहना है।
हमने ब्राह्मण का बाना पहना है, और हमने यह घोषणा की है कि हम धर्म-तंत्र से लोक शिक्षण करेंगे।
धर्म की वह शालीनता, धर्म का वह गौरव — हम उसकी रक्षा करेंगे।
इसलिए आवश्यक है कि आपको ये मर्यादाएं, मर्यादाएं, मर्यादाएं...
पैसे के संबंध में मर्यादाएं।
स्त्रियों के बारे में मर्यादाएं।
आपको वहां, जहां कहीं भी जाना पड़े — इन मर्यादाओं को ध्यान रखना।
अगर आप इन बातों को ध्यान रखेंगे, तो बेटी — आपका पीला कपड़ा जो हमने पहनाया है, उसकी भी इज्जत रह जाएगी।
और आप जो मानपत्र के माध्यम से कार्य करने वाले हैं, उनमें सफलता भी मिलती चली जाएगी।
मुझे उम्मीद है, आप इन बातों को पूरी तरीके से ध्यान में रखेंगे।
और ऐसे कदम बढ़ाएंगे, यहां से जाने के पश्चात — अपने वैयक्तिक जीवन में और सामाजिक जीवन में —
जिससे वो उद्देश्य पूरा होना संभव हो जाए।
आप उसको व्याख्यानों के द्वारा करना चाहते हैं — व्याख्यानों के द्वारा नहीं।
अपने चरित्र और क्रियाकलाप के माध्यम से अगर आप करें, तो हमें खुशी होगी।
और हमारे उद्देश्य की पूर्ति हुई बिना नहीं रहेगी।
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