उपासना के चार कार्य कौन से हैं? | Upasana Ke Char Karya Koun Se Hai
हमें चार काम करने पड़ते हैं, और चार कामों से हमारी उपासना पूर्ण होती है। चार की संख्या मुझे बहुत अच्छी मालूम पड़ी। क्या है यह? सारे का सारा ज्ञान और विज्ञान गायत्री मंत्र का चार वेदों में आ गया है। चार वेदों में चार उन सिद्धांतों का वर्णन है, जिसको कि मैं आज आपको बताना चाहता हूँ।
क्रिया पक्ष चार वेद। और क्या हैं? हिंदू धर्म है, वर्णाश्रम धर्म कहलाता है। वर्णाश्रम धर्म के चार हिस्से हैं — वर्ण चार और आश्रम चार। दोनों को मिला देने से हिंदू धर्म 'वर्णाश्रम' बन जाता है।
देखो, दिशाएँ चार हैं। और अंतःकरण — हमारा जो जीवन है, चेतना है — यह चार हिस्सों में बँटी हुई है। अंतःकरण चतुष्टय उसे कहते हैं — मन, बुद्धि, चित्त और अहंकार। इन चारों के अंतःकरण चतुष्टय के चार खंडों से हमारी चेतना बनी हुई है।
हमारे पद-पुरुषार्थ — जो हम याद दिलाया करते हैं आपको — धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष — ये चार हमारे पुरुषार्थ हैं। चार खंडों में, चार कोनों से एक कमरा बनता है। चार दीवार का, चार कोने का कमरा बनता है। चार हमारे पैर-हाथ हैं। जानवरों के चार पैर ही होते हैं। हमारे दो हाथ, दो पैर हैं। बात वही पड़ जाती है।
चार चीजें। चतुष्पदा गायत्री क्या है साहब? फिर बताइए। यह चार हमने युग निर्माण का संकल्प जब प्रकाशित किया था, तब हमने सब साहब को बताया था — आपको करने के लायक सिर्फ चार चीजें हैं। चार आप करेंगे तो आपकी आत्मा निश्चित रूप से... और चार में से एक काम नहीं करेंगे तो मुक्ति नहीं हो सकती।
यह चार काम कौन से थे? यह — जिस दिन, आज से 30 साल पहले, जिस दिन भारत को स्वाधीनता मिली थी — ठीक उसी दिन युग निर्माण परिवार, जो पहले गायत्री परिवार के नाम से विख्यात था, उसका नाम बदल दिया गया।
पहले हम इसको "मुन्ना-मुन्ना" कहते थे। अब उसको हम "बेटा-बेटा" कहते हैं। क्यों साहब? पहले मुन्ना कहते थे, छोटा था तो मुन्ना कहते थे। अब तो बेटा-बेटा कहते हैं। बेटा इसलिए कहते हैं — बड़ा हो गया है।
पहले इसका नाम "गायत्री परिवार" था। अब "युग निर्माण परिवार" हो गया। बात तो एक ही है।
हाँ बेटे, एक ही है। लेकिन कोई फर्क नहीं पड़ा। दो संस्थाएँ नहीं हैं। दो नहीं हैं — एक ही संस्था है। एक ही हमने गठन किया था 30 तारीख को।
तो हमने यह घोषित किया था कि उपासना में क्या करना पड़ता है? और उपासना के लिए आत्मिक प्रगति के लिए करना क्या पड़ेगा? विचारणा — कल बता चुका।
करना क्या पड़ेगा?
करने के लिए चार काम हमने किए हैं, और चार काम हर आध्यात्मवादी को करने पड़ेंगे।
इससे कम में किसी का काम नहीं चलेगा।
चार से कम जो करेगा, उसकी उपासना निरर्थक चली जाएगी।
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