सार्थक जीवन की जीवन दैनिक साधना ।
जिस दिन आप सो करके उठें, उसी दिन यह रखिए कि बस एक ही दिन हमारे लिए जिंदगी का है, और इस आज के दिन को हम अच्छे से अच्छा बनाकर दिखाएँगे। बस इतनी बात कर लें, तो इसी क्रम को रोज़-रोज़ अपनाते हुए, सारी जिंदगी को भी अच्छा बना सकते हैं।
एक-एक दिन को हिसाब से जोड़ देने का मतलब होता है — सारे समय को, सारी जिंदगी को ठीक तरीके से सुव्यवस्थित बना देना।
प्रातःकाल उठा कीजिए और यह ध्यान किया कीजिए — नया जन्म, हर दिन नया जन्म। हर दिन नया जन्म को लेकर, प्रातःकाल से सायंकाल तक कैसे उपयोग करेंगे?
इसके लिए टाइम-टेबल सवेरे उठकर बना लेना चाहिए —
आप क्या करेंगे? कैसे करेंगे? क्यों करेंगे?
क्रिया के साथ-साथ चिंतन को जोड़ दीजिए। चिंतन और क्रिया को दोनों को जोड़ देते हैं, तो एक समग्र बात बन जाती है।
आप शरीर से काम करते रहें, पर कोई उद्देश्य न हो, और उद्देश्य आप ऊँचे रखें लेकिन उसको क्रियान्वित करने का कोई मौका न हो — तो दोनों ही बातें बेकार हो जाएँगी।
इसीलिए, आप सवेरे उठते ही जहाँ अपने जीवन को सराहें, जहाँ मनुष्य जीवन पर गर्व, गौरव अनुभव करें — वहाँ एक और बात साथ-साथ चालू कर दें।
सायंकाल तक का एक ऐसा टाइम-टेबल बनाएं, जिसको सिद्धांतवादी कहा जा सके, आदर्शवादी कहा जा सके।
इसमें भगवान की हिस्सेदारी रखिए।
शरीर के लिए भी गुज़ारे का समय निकालिए।
भगवान के लिए भी गुज़ारे का समय निकालिए।
भगवान भी तो हिस्सेदार हैं! उसके लिए भी तो कुछ करना है।
आपका शरीर ही सब कुछ थोड़े ही है — आत्मा भी तो कुछ है!
आत्मा के लिए भी कुछ किया जाना चाहिए।
सब कुछ शरीर के लिए ही खिलाने-पिलाने के लिए करेंगे — ऐसा क्यों करेंगे?
क्या आत्मा की कोई औकात नहीं है?
आत्मा की कोई इज्जत नहीं है?
आत्मा का कोई मूल्य नहीं है?
आत्मा से आपका कोई संबंध नहीं है?
अगर है, तो आपको ऐसा करना पड़ेगा।
इसके साथ-साथ दिनचर्या में आदर्शवादी सिद्धांतों को मिलाकर रखना पड़ेगा।
दिनचर्या ऐसी बनाइए जिसमें —
आपका पेट भरने की भी गुंजाइश हो
अपने कुटुंब-परिवार का सहयोग भी हो
और… आत्मा को संतोष देने के लिए, परमात्मा को प्रसन्न करने के लिए कार्य व विचारों का समावेश भी हो
आप स्वाध्याय का दैनिक जीवन में स्थान रखिए।
आप सेवा का दैनिक जीवन में स्थान रखिए।
आप उपासना का दैनिक जीवन में स्थान रखिए।
इन सब बातों का समन्वित जीवन का अभ्यास कर लें —
तो बस… आपका सवेरे का प्रातःकाल वाली संध्या-वंदन पूरा हो जाएगा।
परम पूज्य गुरुदेव पं श्रीराम शर्मा आचार्य
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