आत्महीनता की ग्रंथियां—
Listen online
View page note
Please go to your device settings and ensure that the Text-to-Speech engine is configured properly. Download the language data for Hindi or any other languages you prefer for the best experience.
उदाहरण स्वरूप, आत्महीनता की ग्रन्थि को लीजिये। भौतिक कमी, विकृति, नाटापन, लंगड़ापन, कुरूपता, कानापन, सामाजिक छुटाई, जैसे-वर्ण की हीनता, माता पिता का नैतिक पतन, जारज होना, आर्थिक विपन्नता या हीन व्यवसाय के कारण इस प्रकार के बालकों को अपने साथियों द्वारा एक प्रकार का मानसिक आघात सहना पड़ता है। इस दुखद अनुभूति की पुनरावृत्ति होती चलती है, कई भाव वृत्तियों तथा मनोवेगों का दूषित संघर्ष सा चलता रहता है, जो उनको बाहरी जगत को प्रभावित करने की शक्ति प्रदान करता है। इस ग्रंथि के गुप्त प्रभाव के कारण बच्चा कुछ न कुछ सांकेतिक क्रियाएं किया करता है, जैसे सबसे न बोलना, अधिक शर्माना, कंधे हिलाना, आंखें नीची रखना, ओठ काटना, ओठों को पुनः चाटना, भागने की चेष्टा करना, एकान्त में रहने की इच्छा करना इत्यादि। जो बच्चे कठोर माता पिता अध्यापक या सौतेली माता के अनुशासन में रहते हैं, उनमें कायरता, भय, आत्मविश्वास शून्यता, अनावश्यक डरपोकपन, लज्जा, आलस्य और मानसिक नपुंसकता इत्यादि आ जाता है। बड़े होने परे ऐसे युवक श्रेष्ठ व्यक्ति नहीं बन पाते हैं। ये व्यक्ति प्रायः अन्तर्मुखी वृत्ति के होते हैं।

