उद्दण्ड स्वभाव शक्ति सूचक है
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प्रायः देखा गया है कि प्रतिभाशाली बालक उद्दण्ड स्वभाव के होते हैं। उनकी मानसिक शक्ति इधर-उधर प्रकट होने के लिये भिन्न-भिन्न मार्ग चाहती है। यदि इन्हें अच्छे कार्य तथा मार्ग प्राप्त हो जांय तो निश्चय ही विद्वान बन जाते हैं यह ध्यान रखिए कि उसे व्यर्थ के गन्दे बालकों या घृणित कार्यों में समय व्यय करने का अवकाश प्राप्त न हो तथा वह अपने दण्ड से हतोत्साह न हो जाय? जो पढ़ाई लिखाई का कार्य अपना बालक या शिष्य आत्म-स्वीकृति से करता है, उससे उसकी मानसिक शक्तियों का विकास तीव्रता से होता है। चीजों को बनाने में बच्चों को बड़ा आनन्द आता है। खिलौने, तस्वीरें, गुड़िया, घर, मिट्टी की चीजें बालक के जीवन में रचनात्मक आनन्द तो प्रदान करती ही हैं, बालक की बुद्धि का विकास भी करती रहती हैं।
यह शिक्षा सर्वश्रेष्ठ है जो बच्चे के गुप्त आत्म विश्वास को मजबूत करती चलती है। भय से, डंडे के जोर से तिरस्कार एवं घृणा से आत्महीनता की भावना ग्रन्थियां बनती हैं इसके विपरीत प्रोत्साहन, प्रशंसा, मृदु व्यवहार, से बालक का आत्म विश्वास उत्तरोत्तर अभिवृद्धि को प्राप्त होता जाता है। स्मरण रखिए, जिस बालक को अपनी शक्तियों के प्रति अविश्वास हो जाता है, उसकी हर प्रकार की उन्नति रुक जाती है। वह नई बात नहीं सोच सकता। जिन बच्चों में शारीरिक कमजोरियां हों, उनका आत्म विश्वास और भी अधिकता से पुष्ट करना हमारा पुनीत कर्तव्य हो जाता है। ज्यों-ज्यों बच्चे का आत्मविश्वास बढ़ता है, वह स्कूल का कार्य करने में स्वावलम्बी होता जाता है। बालक की शिक्षा का ध्येय उसे स्वावलम्बी बनाना ही होना चाहिए। अल्प बुद्धि बालक को दूसरे के साथ मिल कर कार्य करने की आदत डालनी चाहिए। शिक्षा में रचनात्मक कार्यों को प्रोत्साहन देना चाहिए।

