भूलने वाले बच्चे
Listen online
View page note
Please go to your device settings and ensure that the Text-to-Speech engine is configured properly. Download the language data for Hindi or any other languages you prefer for the best experience.
पढ़ा हुआ पाठ भूल जाना यह बालकों की स्मरण शक्ति की निर्बलता का सूचक है। ऐसे बालकों का मन अति चलायमान होता है। किसी एक तत्व, विषय या पुस्तक पर वह एकाग्र नहीं हो पाता है। बालकों को प्रेम से पढ़ाने से तथा पुनः-पुनः एक ही बात का अभ्यास कराने से यह कमजोरी धीरे-धीरे दूर हो जाती है।
आवश्यकता इस बात की है कि आप बच्चे को मन्दबुद्धि का मानकर उसके साथ सहानुभूति का व्यवहार करें। प्यार और दुलार से उसे एक-दो बार तत्वों को भूलने पर भी पुनः सहानुभूति से समझा दें। कुछ शिक्षक पाठ को पढ़ाने में इतनी जल्दी करते हैं कि बालक का नन्हा-सा मन पाठ के मूल तत्वों को एक बार में ग्रहण नहीं कर पाता है, इतने ही में वे आगे चल देते हैं। बच्चे का मन पीछे रह जाता है। शिक्षक की इस भाग दौड़ में बच्चे की ग्रहणशक्ति निर्बल पड़ जाती है। उसकी स्मरण शक्ति पर इतना भार एकत्रित हो जाता है, जिसे वह पचा नहीं पाता। फलतः वे बच्चे पढ़ने लिखने में पिछड़ जाते हैं।
प्रत्येक बच्चे को विकास का पूर्ण अवसर दें और सहानुभूतिपूर्ण वातावरण उपस्थित करें। बच्चे को यथासंभव वही शिक्षा दी जाय जिसमें उसकी विशेष रुचि हो। अभिभावकगण अपने स्वार्थ के लिए बच्चे से अरुचि पूर्ण या ऐसा मोटा कार्य न करायें जो वह न कर सके। ऐसे बालक को, जिसमें कोई शारीरिक या मानसिक रोग हो विशेष प्रकार के अध्ययन, मनोरंजन, स्वस्थ भोजन तथा पर्याप्त विश्राम की सुविधाएं प्रदान किया करें, तो पिछड़े हुए बच्चे भी पर्याप्त विकास कर सकते हैं।
मन्द बुद्धि बच्चे विशेष देख-रेख, सहानुभूतिपूर्ण व्यवहार और कुशल शिक्षकों की अपेक्षा करते हैं। उनके जो कुछ भी गुण हों, उनकी पर्याप्त प्रशंसा की जाय और सहानुभूति से उन्हें आगे बढ़ाया जाय। प्रायः लोग ऐसे बच्चों से ऊब जाते हैं। यह उचित नहीं है। घर का प्रत्येक व्यक्ति यदि उसको प्रोत्साहित करे तो वह भी अपना विकास कर लेता है, देर से ही सही।

